Complete Science and Tech - UPSC Science and Technology
Watch Video
Study smarter with Pi Lens
Get Notes, PYQs, Quiz and more for any Youtube video!

Complete Science and Tech - UPSC Science and Technology
198 views
OnlyIAS हिंदी माध्यम
Notes
Video Summary
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के आधारभूत तत्व
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के मुख्य टॉपिक्स
विज्ञान और प्रौद्योगिकी में बायोटेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, रक्षा प्रौद्योगिकी, ऊर्जा (विशेषकर परमाणु ऊर्जा), नैनो तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स आदि से प्रश्न पूछे जाते हैं। इन विषयों को समझने के लिए बुनियादी विज्ञान की समझ आवश्यक है।
- बायोटेक्नोलॉजी: कोशिका, डीएनए, आरएनए, हार्मोन, जनन तंत्र की जानकारी आवश्यक।
- स्वास्थ्य: रक्त, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी, प्लेटलेट्स, हार्मोन, पोषण, विटामिन, रोग प्रतिरोधक क्षमता।
- अन्य टॉपिक्स: अंतरिक्ष, रक्षा, ऊर्जा, नैनो तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी।
कोशिका: संरचना एवं कार्य
कोशिका किसी भी जीव की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई…
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के आधारभूत तत्व
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के मुख्य टॉपिक्स
विज्ञान और प्रौद्योगिकी में बायोटेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, रक्षा प्रौद्योगिकी, ऊर्जा (विशेषकर परमाणु ऊर्जा), नैनो तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स आदि से प्रश्न पूछे जाते हैं। इन विषयों को समझने के लिए बुनियादी विज्ञान की समझ आवश्यक है।
- बायोटेक्नोलॉजी: कोशिका, डीएनए, आरएनए, हार्मोन, जनन तंत्र की जानकारी आवश्यक।
- स्वास्थ्य: रक्त, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी, प्लेटलेट्स, हार्मोन, पोषण, विटामिन, रोग प्रतिरोधक क्षमता।
- अन्य टॉपिक्स: अंतरिक्ष, रक्षा, ऊर्जा, नैनो तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी।
कोशिका: संरचना एवं कार्य
कोशिका किसी भी जीव की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है। यह जीवित इकाइयों से मिलकर बनी होती है, जैसे बिल्डिंग ईंटों से बनती है। कोशिका के कार्य करने से ही जीव कार्य करता है।
- कोशिका झिल्ली (Cell Membrane): सभी कोशिकाओं में पाई जाती है, सुरक्षा व पदार्थों के आवागमन में सहायक।
- कोशिका भित्ति (Cell Wall): पौधों, नीले हरित शैवाल, कवकों, जीवाणुओं में पाई जाती है; जंतुओं में नहीं।
- साइटोप्लाज्म: कोशिका के अंदर जेली जैसा द्रव्य, जैव रासायनिक अभिक्रियाओं का स्थल।
- कोशिकांग (Organelles): माइटोकॉन्ड्रिया (ऊर्जा उत्पादन), लाइसोसोम (आत्महत्या की थैली), केंद्रक (न्यूक्लियस), एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम, राइबोसोम (प्रोटीन निर्माण)।
माइटोकॉन्ड्रिया, लाइसोसोम और अन्य कोशिकांग
माइटोकॉन्ड्रिया को "पावर हाउस ऑफ द सेल" कहा जाता है क्योंकि यह भोजन से प्राप्त ग्लूकोज को एटीपी (Adenosine Triphosphate) के रूप में ऊर्जा में बदलता है। माइटोकॉन्ड्रिया का अपना डीएनए भी होता है।
- लाइसोसोम: इमरजेंसी में संरक्षित भोज्य पदार्थ को सरल रूप में बदलकर ऊर्जा देता है; कोशिका की मृत्यु पर एंजाइम छोड़कर कोशिका को नष्ट करता है, इसलिए "आत्महत्या की थैली"।
- एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम: केंद्रक के चारों ओर, कोशिका को आकार देने में सहायक, "कोशिका का अंतः कंकाल तंत्र"।
- राइबोसोम: प्रोटीन निर्माण में सहायक।
डीएनए, आरएनए, जीन और अनुवांशिकता
डीएनए (डिऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड) और आरएनए (राइबो न्यूक्लिक एसिड) अनुवांशिक पदार्थ हैं। डीएनए डबल हेलिक्स संरचना का होता है, जबकि आरएनए सिंगल हेलिक्स (धागेनुमा) होता है।
- डीएनए: पेंटोज शुगर, फास्फेट, चार नाइट्रोजन क्षार (एडिनीन, थाइमिन, ग्वानिन, साइटोसिन)।
- आरएनए: पेंटोज शुगर, फास्फेट, चार नाइट्रोजन क्षार (एडिनीन, ग्वानिन, साइटोसिन, यूरेसिल; थाइमिन के स्थान पर यूरेसिल)।
- जीन: डीएनए के छोटे-छोटे भाग, जो नाइट्रोजन क्षारों के क्रम से बने होते हैं; मनुष्य में 20,000 से 30,000 जीन।
- गुणसूत्र: मनुष्य में 23 जोड़े (कुल 46), डीएनए व हिस्टोन प्रोटीन से बने।
- अनुवांशिकता: माता-पिता के शुक्राणु (23 गुणसूत्र) व अंडाणु (23 गुणसूत्र) से मिलकर संतान के 46 गुणसूत्र बनते हैं।
- ट्रांसक्रिप्शन: जीन द्वारा आरएनए को निर्देश देना।
- ट्रांसलेशन: आरएनए द्वारा प्रोटीन निर्माण।
- अनुवांशिक रोग: जीन या गुणसूत्र की खराबी से उत्पन्न रोग, जैसे हीमोफीलिया, कलर ब्लाइंडनेस, सिकल सेल एनीमिया, डाउन सिंड्रोम।
पोषण: कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन
पोषण के लिए भोजन में मुख्यतः कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन आवश्यक हैं।
- कार्बोहाइड्रेट: ऊर्जा का स्रोत, रोटी, चावल, आलू में; पाचन के बाद ग्लूकोज () में बदलता है।
- प्रोटीन: शरीर की संरचना, मांसपेशियों, बाल, हार्मोन, एंजाइम निर्माण; अंडा, मटन, दाल, सोयाबीन में; पाचन के बाद अमीनो अम्ल में बदलता है।
- वसा (फैट): ऊर्जा का भंडारण, शरीर का तापमान नियंत्रण; तेल, घी, अंडा में; पाचन के बाद वसीय अम्ल (फैटी एसिड) में बदलता है।
- विटामिन: छोटी मात्रा में आवश्यक, दो प्रकार—वसा में घुलनशील (A, D, E, K), पानी में घुलनशील (B, C)।
- वसा में घुलनशील विटामिन शरीर में स्टोर होते हैं, अधिकता में टॉक्सिसिटी।
- पानी में घुलनशील विटामिन पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाते हैं।
विटामिन, कमी व रोग (तालिका)
| विटामिन | अन्य नाम | कमी से रोग |
|---|---|---|
| A | रेटिनॉल | रतौंधी |
| B1 | थाइमिन | बेरीबेरी |
| B2 | राइबोफ्लेमिन | अरीबोफ्लविनोसिस (मुंह में छाले) |
| B3 | नियासिन | पेलाग्रा (डायरिया, याददाश्त कम) |
| B5 | पेंटोथेनिक एसिड | पैरस्थीसिया (हार्ट अटैक, हाथ-पांव कांपना) |
| B6 | पीरडॉक्सिन | एनीमिया |
| B7 | बायोटीन | डर्मेटाइटिस (त्वचा में सूजन) |
| B9 | फोलिक एसिड | मेगैलोब्लास्टिक एनीमिया |
| B12 | साइनोकोबालामिन | परनीशियस एनीमिया |
| C | एस्कॉर्बिक एसिड | स्कर्वी (मसूड़ों में सूजन, ब्लीडिंग) |
| D | कोलीकल्सिफेरोल | रिकेट्स (बच्चों में), ऑस्टियोमलेशिया (बड़ों में) |
| E | टोकोफेरोल | एनीमिया, पुरुष नपुंसकता, स्किन में झुर्रियां |
| K | फाइलोनोन | रक्त का थक्का न जमना |
रक्त: संरचना, प्रकार और कार्य
रक्त दो भागों में बंटा होता है—प्लाज्मा (तरल भाग) और कोशिकीय भाग (आरबीसी, डब्ल्यूबीसी, प्लेटलेट्स)। प्लाज्मा 55% (मुख्यतः पानी, प्रोटीन, खनिज, एंटीबॉडी), कोशिकीय भाग 45%।
- आरबीसी (Red Blood Cells): अस्थि मज्जा में निर्माण, जीवनकाल 120 दिन, प्लीहा (स्प्लीन) में नष्ट; सतह पर हीमोग्लोबिन (ऑक्सीजन व कार्बन डाइऑक्साइड का वहन), एंटीजन (A, B)।
- ब्लड ग्रुप: आरबीसी की सतह पर एंटीजन के आधार पर—A, B, AB, O; आरएच फैक्टर (पॉजिटिव/नेगेटिव)।
- डब्ल्यूबीसी (White Blood Cells): रोग प्रतिरोधक क्षमता, पांच प्रकार—न्यूट्रोफिल, ईसोफिल, बेसोफिल, लिंफोसाइट, मोनोसाइट; एंटीबॉडी निर्माण (वाई शेप), फगोसाइटोसिस (दुश्मन को घेरकर खाना)।
- प्लेटलेट्स: रक्त का थक्का जमाने में सहायक; कैल्शियम, विटामिन K, फैक्टर VIII, प्रोथ्रोम्बिन, फिब्रिनोजन भी सहायक।
हार्मोन एवं ग्रंथियां
हार्मोन शरीर की विभिन्न गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। मुख्य ग्रंथियां व उनके हार्मोन:
- पिट्यूटरी ग्रंथि (ब्रेन के पास):
- ग्रोथ हार्मोन: वृद्धि, अधिकता—भीमकाय, कमी—बौनापन।
- टीएसएच: थायरॉइड ग्रंथि को नियंत्रित करता है।
- एसीटीएच: एड्रिनल ग्रंथि को नियंत्रित करता है।
- एफएसएच: शुक्राणु/अंडाणु निर्माण।
- एलएच: शुक्राणु/अंडाणु परिपक्वता।
- प्रोलैक्टिन: महिलाओं में दुग्ध निर्माण।
- ऑक्सीटोसिन (पश्च पिट्यूटरी): दुग्ध निर्माण, बच्चे के जन्म में सहायक (बर्थ हार्मोन), प्रेम हार्मोन।
- एंटी डायरेटिक हार्मोन: किडनी में पानी का अवशोषण।
- पीनियल ग्रंथि (ब्रेन में): मेलाटोनिन हार्मोन, जैविक घड़ी (सोना-उठना) नियंत्रित।
- थायरॉइड ग्रंथि (गले में): थायरोक्सिन हार्मोन, उपापचय नियंत्रित; कमी से घेंघा रोग (ग्वाइटर), आयोडीन आवश्यक।
- पैंक्रियाज (अग्नाशय):
- अल्फा सेल: ग्लूकागॉन हार्मोन (ब्लड ग्लूकोज बढ़ाता है)।
- बीटा सेल: इंसुलिन हार्मोन (ब्लड ग्लूकोज घटाता है); कमी से डायबिटीज मेलाइटस।
- डेल्टा सेल: सोमेटोस्टैटिन (एंटी ग्रोथ हार्मोन)।
- एड्रिनल ग्रंथि (किडनी के ऊपर): एड्रिनलीन/नॉरएड्रिनलीन (इमरजेंसी हार्मोन, हृदय गति व ब्लड सप्लाई बढ़ाता है)।
- टेस्टिस (पुरुष): टेस्टोस्टेरोन (मेल फीचर्स), शुक्राणु निर्माण।
- ओवरी (महिला): एस्ट्रोजन (फीमेल फीचर्स), प्रोजेस्टेरोन (गर्भावस्था), रिलैक्सिन (बर्थ हार्मोन)।
मानव जनन तंत्र
मानव जनन तंत्र में पुरुष व महिला के अलग-अलग अंग व कार्य होते हैं।
- पुरुष जनन तंत्र:
- टेस्टिस: टेस्टोस्टेरोन हार्मोन, शुक्राणु निर्माण।
- वास डिफरेंस (शुक्र नलिका): शुक्राणु को पेनिस तक पहुंचाना।
- सेमाइनल वेसाइकल, प्रोस्टेट ग्लैंड: पोषक पदार्थ मिलाना।
- सीमन = शुक्राणु + पोषक पदार्थ।
- महिला जनन तंत्र:
- वाइना (योनि): पेनिस का प्रवेश, सीमन का इजेकुलेशन।
- यूट्रस (गर्भाशय): भ्रूण का विकास।
- ओवरी (अंडाशय): अंडाणु व हार्मोन निर्माण।
- फैलोपियन ट्यूब: निषेचन (स्पर्म व ओवम का मिलन)।
कोशिकीय श्वसन, ब्लड ग्रुप व रोग प्रतिरोधक क्षमता
कोशिकीय श्वसन में भोजन से प्राप्त ग्लूकोज व ऑक्सीजन के अभिक्रिया से ऊर्जा, कार्बन डाइऑक्साइड व पानी बनते हैं। हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन व कार्बन डाइऑक्साइड का वहन करता है।
- ब्लड ग्रुप निर्धारण: आरबीसी की सतह पर एंटीजन (A, B) व आरएच फैक्टर की उपस्थिति/अनुपस्थिति से।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता: डब्ल्यूबीसी द्वारा एंटीबॉडी निर्माण व फगोसाइटोसिस प्रक्रिया से।
अनुवांशिक रोग एवं उनके उदाहरण
जीन या गुणसूत्र की खराबी से उत्पन्न रोगों को अनुवांशिक रोग कहते हैं। इनमें हीमोफीलिया (रक्त का थक्का न जमना), कलर ब्लाइंडनेस (रंगों की पहचान न होना), सिकल सेल एनीमिया (आरबीसी का आकार बदलना), डाउन सिंड्रोम (मानसिक व शारीरिक विकास में कमी) प्रमुख हैं।
- हीमोफीलिया: रक्त का थक्का नहीं जमता।
- कलर ब्लाइंडनेस: रंगों की पहचान में समस्या।
- सिकल सेल एनीमिया: आरबीसी हसिए के आकार के, हीमोग्लोबिन की कमी।
- डाउन सिंड्रोम: मानसिक व शारीरिक विकास में कमी।
निष्कर्ष: आधारभूत विज्ञान की महत्ता
सभी प्रमुख विज्ञान व प्रौद्योगिकी विषयों को समझने के लिए कोशिका, डीएनए, आरएनए, जीन, पोषण, रक्त, हार्मोन, जनन तंत्र, रोग प्रतिरोधक क्षमता आदि की बुनियादी समझ आवश्यक है। इन आधारों के बिना बायोटेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य, स्पेस टेक्नोलॉजी, डिफेंस आदि विषयों को गहराई से समझना संभव नहीं।
Quiz
40 QuestionsClick on an option to find the answer
Question 1 of 40
बायोमार्कर के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
यह किसी जीव के अंदर होने वाली सामान्य या असामान्य प्रक्रिया को इंगित करता है। बायोमार्कर का उपयोग रोग की रोकथाम, उसका पता लगाने और निगरानी के लिए किया जा सकता है।उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Solution
1 और 2 दोनों
Solution
उपरोक्त में से कितने सीक्वेंस एनोटेशन तथा जैवसूचनाविज्ञान (बायोइन्फॉर्मेटिक्स) की विधियों से संबंधित हैं?
Solution
तीनों
Flashcards
12 CardsClick to reveal answerTap the card to see answer