FINAL REVISION One Shot Environment UPSC - UPSC Environment
Watch Video
Study smarter with Pi Lens
Get Notes, PYQs, Quiz and more for any Youtube video!

FINAL REVISION One Shot Environment UPSC - UPSC Environment
74 views
OnlyIAS हिंदी माध्यम
Notes
Video Summary
पर्यावरण एवं जैव विविधता
बायोस्फीयर रिजर्व: अवधारणा, संरचना और उद्देश्य
बायोस्फीयर रिजर्व स्थल और समुद्र के ऐसे क्षेत्र हैं जो प्राकृतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं। इनका उद्देश्य पारिस्थितिकी, जैव विविधता का संरक्षण, मानव-प्रकृति संघर्ष को न्यूनतम करना और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। बायोस्फीयर रिजर्व की अवधारणा 1971 में यूनेस्को के मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम के तहत आई।
- संरचना: तीन क्षेत्र – कोर (आंतरिक, सर्वाधिक संरक्षित), बफर (सीमित मानवीय गतिविधियां), ट्रांजिशन (सतत कृषि, पर्यटन, आजीविका)
- घोषणा: भारत में केंद्र सरकार द्वारा, यूनेस्को के वर्ल्ड नेटवर्क में शामिल करने हेतु विस्तृत प्रस्ताव…
पर्यावरण एवं जैव विविधता
बायोस्फीयर रिजर्व: अवधारणा, संरचना और उद्देश्य
बायोस्फीयर रिजर्व स्थल और समुद्र के ऐसे क्षेत्र हैं जो प्राकृतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं। इनका उद्देश्य पारिस्थितिकी, जैव विविधता का संरक्षण, मानव-प्रकृति संघर्ष को न्यूनतम करना और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। बायोस्फीयर रिजर्व की अवधारणा 1971 में यूनेस्को के मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम के तहत आई।
- संरचना: तीन क्षेत्र – कोर (आंतरिक, सर्वाधिक संरक्षित), बफर (सीमित मानवीय गतिविधियां), ट्रांजिशन (सतत कृषि, पर्यटन, आजीविका)
- घोषणा: भारत में केंद्र सरकार द्वारा, यूनेस्को के वर्ल्ड नेटवर्क में शामिल करने हेतु विस्तृत प्रस्ताव रिपोर्ट भेजी जाती है
- मानदंड: इकोलॉजिकल महत्व, जैव विविधता, संरक्षण मूल्य, स्थानीय समुदाय की भागीदारी
- संख्या: भारत में 18 बायोस्फीयर रिजर्व, जिनमें से 13 यूनेस्को के वर्ल्ड नेटवर्क में
- प्रमुख उदाहरण: नीलगिरी (पहला), कच्छ (सबसे बड़ा), डिब्रूसेखोवा (सबसे छोटा), पन्ना (नवीनतम), कोल्ड डेजर्ट (13वां यूनेस्को नेटवर्क में)
संरक्षित क्षेत्र: नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, टाइगर रिजर्व
संरक्षित क्षेत्रों के प्रकारों में नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सेंचुरी और टाइगर रिजर्व शामिल हैं। इनका उद्देश्य वन्य जीवों, पारिस्थितिकी और विशिष्ट प्रजातियों का संरक्षण है। इनकी स्थापना वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत होती है।
- नेशनल पार्क: केंद्र/राज्य सरकार द्वारा, सीमाएं स्पष्ट, मानवीय गतिविधियों पर कठोर नियंत्रण, अपग्रेडेशन संभव (वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से)
- वाइल्ड लाइफ सेंचुरी: सामान्यतः राज्य सरकार द्वारा, सीमाएं अस्पष्ट, नियंत्रण अपेक्षाकृत कम, भविष्य में नेशनल पार्क में अपग्रेड संभव
- टाइगर रिजर्व: अलग से क्षेत्र घोषित नहीं, पूर्ववर्ती संरक्षित क्षेत्र में प्रबंधन व संरक्षण स्तर बढ़ाया जाता है
- संख्या: नेशनल पार्क – 107, वाइल्ड लाइफ सेंचुरी – 573, टाइगर रिजर्व – 58
इकोलॉजिकल सेंसिटिव जोन (ESZ) और बफर जोन
इकोलॉजिकल सेंसिटिव जोन संरक्षित क्षेत्रों के चारों ओर बनाए जाते हैं ताकि मानव-वन्य जीव संघर्ष कम हो सके। इनकी अधिसूचना पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत होती है, न कि वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत।
- सीमा: न्यूनतम 1 किमी (सुप्रीम कोर्ट निर्देश), अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं
- गतिविधियां: तीन श्रेणियां – प्रतिबंधित (उद्योग, प्रदूषणकारी गतिविधियां), विनियमित (पेड़ कटाई, होटल निर्माण), अनुमत (पारंपरिक कृषि, वर्षा जल संचयन)
- घोषणा: केंद्र सरकार द्वारा, मंत्रालय – पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन
आद्रभूमि (वेटलैंड्स) और रामसर कन्वेंशन
आद्रभूमि वे क्षेत्र हैं जो स्थायी या अस्थायी रूप से जलमग्न रहते हैं, इनमें जैविक उत्पादकता अधिक होती है। इन्हें पृथ्वी की किडनी कहा जाता है। रामसर कन्वेंशन (1971, ईरान) अंतरराष्ट्रीय महत्व की आद्रभूमियों के संरक्षण और सतत उपयोग पर केंद्रित है।
- प्रकार: अंतर्भूमि (प्राकृतिक/मानव निर्मित), तटीय (लवणीय, ज्वारीय, मैंग्रोव, कोरल रीफ)
- परिभाषा: जल की गहराई लो टाइड में 6 मीटर से अधिक नहीं, 7 दिन तक जलमग्न मृदा भी वेटलैंड मानी जाती है
- रामसर साइट्स: भारत में 99 (मई 2026 तक), सबसे अधिक तमिलनाडु (20), यूपी (12)
- विशेष: सबसे बड़ा – सुंदरवन, सबसे छोटा – रेणुका झील, सबसे पुराना – चिल्का व केवलादेव (1981)
- मॉन्ट्रियक्स रिकॉर्ड: गंभीर पारिस्थितिकीय परिवर्तन वाली वेटलैंड्स की सूची, भारत में लोकटक झील व केवलादेव
प्रदूषण: परिभाषा, प्रकार, स्रोत एवं नियंत्रण
प्रदूषण भौतिक वातावरण में ऐसे पदार्थों का प्रवेश है जो उसकी गुणवत्ता को क्षरण करते हैं और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। प्रदूषक (Pollutants) दो प्रकार के होते हैं – प्राथमिक (सीधे वातावरण में) व द्वितीयक (रासायनिक अभिक्रिया से बने)।
- प्राथमिक प्रदूषक: CO, CO2, SO2, NOx, SPM
- द्वितीयक प्रदूषक: ग्राउंड लेवल ओजोन (O3), पेरोक्सी एसिटिल नाइट्रेट, नाइट्रिक एसिड
- स्रोत: तापीय विद्युत संयंत्र (SO2, CO, NOx, SPM, लेड), सीमेंट उद्योग (PM, NOx, SOx, CO), उर्वरक उद्योग (SOx, अमोनिया, NOx, डस्ट, हाइड्रोजन फ्लोराइड), खनन (आर्सेनिक, मरकरी, लेड, पीएम)
- इनडोर व आउटडोर प्रदूषण: इनडोर अधिक खतरनाक, जागरूकता कम
पार्टिकुलेट मैटर (PM) और फ्लाई ऐश
पार्टिकुलेट मैटर वायुमंडल में सूक्ष्म कण हैं जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। फ्लाई ऐश तापीय विद्युत संयंत्रों से निकलने वाली राख है जिसमें एलुमिनियम सिलिकेट, कैल्शियम ऑक्साइड, लेड, आर्सेनिक आदि होते हैं।
- PM10: व्यास 10 माइक्रोमीटर से कम, श्वसन नलिका प्रभावित
- PM2.5: व्यास 2.5 माइक्रोमीटर से कम, फेफड़े प्रभावित
- PM1.0: व्यास 1 माइक्रोमीटर से कम, रक्त व मस्तिष्क तक पहुंच सकता है
- फ्लाई ऐश उपयोग: ईंट निर्माण, खदान भराई, सीमित मात्रा में मिट्टी में
वायु गुणवत्ता निगरानी एवं मानक
सरकार विभिन्न कार्यक्रमों के तहत वायु प्रदूषकों की निगरानी करती है। मुख्य कार्यक्रम हैं नेशनल एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्रोग्राम, नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स, नेशनल एंबिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स, WHO गाइडलाइन।
- नेशनल एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्रोग्राम: SO2, NO2, PM2.5, PM10
- नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स: उपरोक्त चार + O3, CO, अमोनिया, लेड (कुल 8)
- नेशनल एंबिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स: उपरोक्त आठ + निकेल, आर्सेनिक, बेंजीन, बेंजोपाइरीन (कुल 12)
- WHO गाइडलाइन (2021): PM2.5 – वार्षिक 5 माइक्रोग्राम/मी³, 24 घंटे में 15; PM10 – 15/45; O3 – 60/100; NO2 – 10/25; SO2 – 40; CO – 4
जैव विविधता: स्तर, लाभ एवं इकोसिस्टम सर्विज
जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन की विविधता है, जिसमें जेनेटिक, प्रजाति और पारिस्थितिकीय स्तर शामिल हैं। जैव विविधता इकोसिस्टम की उत्पादकता, स्थिरता, पोषण चक्र, प्रदूषण नियंत्रण, औषधि, भोजन, पर्यटन आदि में योगदान देती है।
- स्तर: जेनेटिक (एक प्रजाति के भीतर जीन विविधता), प्रजाति (एक इकोसिस्टम में विभिन्न प्रजातियां), पारिस्थितिकीय (विभिन्न पारितंत्र)
- स्पीशीज रिचनेस: प्रजातियों की संख्या
- स्पीशीज इवननेस: प्रजातियों का समान वितरण
- इकोसिस्टम सर्विज: प्रोविजनिंग (भोजन, जल, औषधि), रेगुलेटिंग (जलवायु, बाढ़, सूखा नियंत्रण), सपोर्टिंग (पोषक चक्र, मृदा निर्माण), कल्चरल (धार्मिक, सांस्कृतिक महत्व)
- सर्वाधिक महत्वपूर्ण: सपोर्टिंग सर्विज
जैव विविधता संरक्षण: अंतरराष्ट्रीय पहल एवं भारत की रणनीति
1992 के रियो अर्थ समिट से तीन प्रमुख कन्वेंशन निकले – UNFCCC (जलवायु परिवर्तन), UNCBD (जैव विविधता), UNCCD (भूमि क्षरण)। UNCBD के तहत जैव विविधता संरक्षण, सतत उपयोग और लाभों का न्यायसंगत वितरण मुख्य उद्देश्य हैं।
- COP बैठकें: हर दो वर्ष में, अब तक 16, अगली 2026 में आर्मेनिया (येरेवान)
- ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क: 2030 तक 30% जैव विविधता संरक्षण, 30% डिग्रेडेड बायोडायवर्सिटी का रिस्टोरेशन, कीटनाशक/पेस्टिसाइड उपयोग 50% कम करना, इन्वेसिव एलियन स्पीशीज नियंत्रण
- भारत की रणनीति: नेशनल बायोडायवर्सिटी एक्ट 2002, नेशनल बायोडायवर्सिटी अथॉरिटी (चेन्नई), स्टेट बोर्ड्स, लोकल कमेटीज
- नगोया प्रोटोकॉल: एक्सेस बेनिफिट शेयरिंग, डिजिटल सीक्वेंस इंफॉर्मेशन को 2025 के नियमों में शामिल किया गया
अंतरराष्ट्रीय संधियां एवं संरक्षित क्षेत्र
- रामसर कन्वेंशन: वेटलैंड्स संरक्षण, सतत उपयोग, मॉन्ट्रियक्स रिकॉर्ड (गंभीर संकटग्रस्त वेटलैंड्स)
- CITES: वन्य जीवों व वनस्पतियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार का नियमन, तीन अनुसूचियां (Appendix I, II, III), भारत 1976 से सदस्य
- IUCN: रेड लिस्ट, 1948 स्थापना, भारत 1969 से सदस्य, 2025 में भारत अपनी रेड लिस्ट प्रकाशित करेगा (7000 वनस्पति, 4000 जीव)
- UNOC3: महासागरों के संरक्षण हेतु, SDG 14 के अनुरूप, नीस (फ्रांस) में 2024 में बैठक
सुप्रीम कोर्ट वन शक्ति फैसला एवं पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन
सुप्रीम कोर्ट ने मई 2023 में पूर्वव्यापी पर्यावरण मंजूरी (एक्स पोस्ट फैक्टो अप्रूवल) को अवैध घोषित किया, बाद में निर्णय वापस लिया। पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) अधिसूचना 2006, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत, परियोजनाओं को कैटेगरी A (केंद्र) व B (राज्य) में विभाजित करती है।
- जन सुनवाई: कुछ परियोजनाओं में अनिवार्य, कुछ में छूट
- मंजूरी वैधता: माइनिंग – 30 वर्ष, नदी घाटी – 10 वर्ष, उद्योग/इन्फ्रास्ट्रक्चर – 7 वर्ष
अन्य समसामयिक पहल एवं तथ्य
- इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस: 95 देशों का गठबंधन, 7 बिग कैट्स (टाइगर, लायन, लेपर्ड, स्नो लेपर्ड, चीता, जगवार, प्यूमा), भारत में 5 पाई जाती हैं
- हाई सी ट्रीटी: 200 नॉटिकल माइल से आगे के समुद्री क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण, लाभों का न्यायसंगत वितरण, भारत हस्ताक्षरकर्ता
- अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट: 1500 किमी लंबा, 5 किमी चौड़ा, धूल प्रदूषण व थार के विस्तार को रोकने हेतु
- कैली फंड: जैव विविधता वित्त पोषण हेतु, 50% फंड लोकल कम्युनिटी को
- ग्रीन क्लाइमेट फंड: क्लाइमेट चेंज के लिए समर्पित, भारत में एडीबी के साथ साझेदारी
संभावित परीक्षा प्रश्न बिंदु
- बायोस्फीयर रिजर्व की संरचना व उद्देश्य
- नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, टाइगर रिजर्व में अंतर
- इकोलॉजिकल सेंसिटिव जोन की सीमा व गतिविधियां
- रामसर साइट्स, मॉन्ट्रियक्स रिकॉर्ड, भारत की वेटलैंड्स
- प्रदूषकों के प्रकार, स्रोत, PM के प्रभाव
- जैव विविधता के स्तर, इकोसिस्टम सर्विज
- UNCBD, नगोया प्रोटोकॉल, डिजिटल सीक्वेंस इंफॉर्मेशन
- सुप्रीम कोर्ट वन शक्ति फैसला, EIA प्रक्रिया
- इंटरनेशनल बिग कैट्स, हाई सी ट्रीटी, अरावली ग्रीन वॉल
- कैली फंड, ग्रीन क्लाइमेट फंड, IUCN रेड लिस्ट
नोट: सभी तथ्य, संख्याएं व प्रक्रियाएं अद्यतन (मई 2026 तक) के अनुसार।
Quiz
40 QuestionsClick on an option to find the answer
Question 1 of 40
'R2 व्यवहार संहिता’ (R2 Code of Practises) किसे अपनाने को बढ़ावा देने के लिए एक उपलब्ध उपकरण है?
Solution
इलेक्ट्रॉनिकी पुनर्चक्रण उद्योग में पर्यावरणीय दृष्टि से विश्वसनीय व्यवहार
निम्नलिखित में से किस संरक्षण स्थल या विधि को इन-सीटू जैव विविधता संरक्षण का रूप नहीं माना जाता है?
Solution
जीन बैंक
'जैव विविधता कोल्डस्पॉट (Biodiversity Coldspots के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
ये क्षेत्र बहुत उच्च स्तर की प्रजातीय सम्पन्नता वाले होते हैं। इन क्षेत्रों को पर्यावास के ह्रास की उच्च दर का सामना करना पड़ रहा है।उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Solution
केवल 2
Flashcards
14 CardsClick to reveal answerTap the card to see answer