Gold Monetization RBI Ki Nayi Chaal! - UPSC Economy
Watch Video
Study smarter with Pi Lens
Get Notes, PYQs, Quiz and more for any Youtube video!

Gold Monetization RBI Ki Nayi Chaal! - UPSC Economy
27 views
OnlyIAS हिंदी माध्यम
Notes
Video Summary
स्वर्ण मौद्रीकरण योजना और आरबीआई की नई रणनीति
भारत में निजी परिवारों के पास विश्व में सबसे अधिक सोने का भंडार है, जो लगभग 25,000 टन है। यह मात्रा अमेरिका के सेंट्रल बैंक के पास मौजूद सोने (लगभग 8,000 टन) से भी कहीं अधिक है। यह सोना आमतौर पर निष्क्रिय (डेड) रहता है और अर्थव्यवस्था में सक्रिय योगदान नहीं देता। इसी संदर्भ में सरकार और आरबीआई ने स्वर्ण मौद्रीकरण योजना के माध्यम से इस सोने को आर्थिक प्रवाह में लाने की पहल की है।
भारत में सोने का भंडार: वैश्विक तुलना
भारत के निजी परिवारों के पास लगभग…
स्वर्ण मौद्रीकरण योजना और आरबीआई की नई रणनीति
भारत में निजी परिवारों के पास विश्व में सबसे अधिक सोने का भंडार है, जो लगभग 25,000 टन है। यह मात्रा अमेरिका के सेंट्रल बैंक के पास मौजूद सोने (लगभग 8,000 टन) से भी कहीं अधिक है। यह सोना आमतौर पर निष्क्रिय (डेड) रहता है और अर्थव्यवस्था में सक्रिय योगदान नहीं देता। इसी संदर्भ में सरकार और आरबीआई ने स्वर्ण मौद्रीकरण योजना के माध्यम से इस सोने को आर्थिक प्रवाह में लाने की पहल की है।
भारत में सोने का भंडार: वैश्विक तुलना
भारत के निजी परिवारों के पास लगभग 25,000 टन सोना है, जो विश्व में सर्वाधिक है। अमेरिका के सेंट्रल बैंक के पास लगभग 8,000 टन सोना है, जो भारत की तुलना में काफी कम है। यह सोना आमतौर पर घरों में निष्क्रिय रूप से रखा जाता है और इसका आर्थिक उपयोग नहीं होता।
- भारत: 25,000 टन (निजी परिवारों के पास)
- अमेरिका: 8,000 टन (सेंट्रल बैंक के पास)
- विशेष: भारत का सोना डेड असेट के रूप में रहता है
स्वर्ण मौद्रीकरण योजना (Gold Monetization Scheme) का उद्देश्य
सरकार ने 2015 में स्वर्ण मौद्रीकरण योजना शुरू की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में सोने के आयात को कम करना था। इस योजना के तहत, परिवारों के पास रखा हुआ सोना या आभूषण बैंक में जमा किए जा सकते हैं, जिससे वह निष्क्रिय पूंजी सक्रिय हो जाती है।
- आयात में कमी: घरेलू सोने का उपयोग बढ़ाकर आयात पर निर्भरता घटाना
- निष्क्रिय पूंजी का उपयोग: घरों में रखा सोना बैंकिंग प्रणाली में लाना
- लाभ: ब्याज अर्जन और सोने की सुरक्षा
योजना के तहत खाता प्रकार
योजना के अंतर्गत तीन प्रकार के खाते खोले जा सकते थे: लघु अवधि, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक खाते। प्रत्येक खाते की अवधि और लाभ अलग-अलग निर्धारित थे।
- लघु अवधि खाता: 1 से 3 वर्ष, बैंकों द्वारा संचालित, ब्याज सहित सोना या नगद वापसी
- मध्यम अवधि खाता: सरकार द्वारा संचालित, ब्याज सहित सोने का मूल्य वापसी
- दीर्घकालिक खाता: सरकार द्वारा संचालित, ब्याज सहित सोने का मूल्य वापसी
ब्याज और वापसी की शर्तें
लघु अवधि खाते में बैंक परिवारों से सोना लेते हैं और बदले में ब्याज देते हैं। मैच्योरिटी पर परिवार सोना या नगद, जो भी चाहें, बैंक से प्राप्त कर सकते हैं। मध्यम और दीर्घकालिक खातों में ब्याज के साथ सोने का मूल्य दिया जाता था, न कि वास्तविक सोना।
- लघु अवधि: ब्याज सहित सोना या नगद वापसी
- मध्यम/दीर्घकालिक: ब्याज सहित सोने का मूल्य वापसी
- वर्तमान स्थिति: मध्यम और दीर्घकालिक खाते बंद, केवल लघु अवधि खाता चालू
योजना में हुए बदलाव
सोने के दाम में तेज़ी के कारण सरकार ने मध्यम और दीर्घकालिक खाते बंद कर दिए। वर्तमान में केवल लघु अवधि (1-3 वर्ष) खाते बैंकों के लिए खुले हैं। बैंक इन खातों के माध्यम से परिवारों से सोना लेते हैं और ब्याज देते हैं।
- मध्यम/दीर्घकालिक खाते: बंद कर दिए गए
- लघु अवधि खाता: चालू, बैंकों द्वारा संचालित
आरबीआई की आगामी रणनीति
आरबीआई इस योजना को और अधिक मॉडिफाई करने जा रही है। नए बदलावों के तहत आम परिवारों को अपने पास रखे सोने से अधिक लाभ मिलेगा। यह योजना परिवारों को ब्याज सहित अधिक लाभ और पैसा देने की दिशा में बढ़ेगी।
- लाभ: निष्क्रिय सोने से ब्याज सहित अधिक लाभ
- संभावित बदलाव: योजना में संशोधन, परिवारों के लिए अधिक आकर्षक विकल्प
चालू खाता घाटा और सोने का आयात
सोने का भारी मात्रा में आयात भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को बढ़ाता है। इससे रुपए का मूल्य घटता है और आरबीआई के विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स) में कमी आती है। डॉलर का बाह्य प्रवाह बढ़ने से रुपए की कीमत पर दबाव पड़ता है।
- चालू खाता घाटा: सोने के आयात से बढ़ता है
- रुपए का मूल्य: डॉलर के बाह्य प्रवाह से घटता है
- फॉरेक्स रिजर्व: आरबीआई के भंडार में कमी
योजना के आर्थिक प्रभाव
स्वर्ण मौद्रीकरण योजना से न केवल परिवारों को निष्क्रिय सोने से लाभ मिलता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। आयात में कमी, चालू खाता घाटा नियंत्रण और फॉरेक्स रिजर्व की सुरक्षा इसके प्रमुख आर्थिक प्रभाव हैं।
- आर्थिक प्रवाह: निष्क्रिय सोना बैंकिंग प्रणाली में सक्रिय
- आयात में कमी: विदेशी मुद्रा की बचत
- फॉरेक्स रिजर्व: संरक्षण
परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु
स्वर्ण मौद्रीकरण योजना का उद्देश्य घरेलू सोने को बैंकिंग प्रणाली में लाकर आयात पर निर्भरता कम करना है। योजना के तहत तीन प्रकार के खाते थे, जिनमें से वर्तमान में केवल लघु अवधि खाता चालू है। आरबीआई इस योजना में नए बदलाव लाने की तैयारी में है, जिससे परिवारों को अधिक लाभ मिलेगा और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
- भारत में निजी स्वर्ण भंडार विश्व में सर्वाधिक
- स्वर्ण मौद्रीकरण योजना 2015 में शुरू
- तीन प्रकार के खाते: लघु, मध्यम, दीर्घकालिक
- मध्यम और दीर्घकालिक खाते बंद, लघु अवधि चालू
- ब्याज सहित सोना या नगद वापसी (लघु अवधि)
- आरबीआई द्वारा योजना में संभावित संशोधन
- सोने का आयात चालू खाता घाटा बढ़ाता है
- योजना से आर्थिक प्रवाह और फॉरेक्स रिजर्व में सुधार
Quiz
10 QuestionsClick on an option to find the answer
Question 1 of 10
Solution
Solution
Solution
Flashcards
5 CardsClick to reveal answerTap the card to see answer