WMA, SDF and Overdraft RBI's Hidden System - UPSC Economics
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WMA, SDF and Overdraft RBI's Hidden System - UPSC Economics
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वेज़ एंड मींस एडवांस (WMA), विशेष आहरण सुविधा (SDF) और ओवरड्राफ्ट: आरबीआई की अल्पकालिक उधार प्रणाली
भारत में केंद्र और राज्य सरकारों के खर्च और आय में अक्सर अस्थायी असंतुलन उत्पन्न होता है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए आरबीआई द्वारा केंद्र और राज्य सरकारों को अल्पकालिक उधार की विशेष व्यवस्थाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। इन व्यवस्थाओं में वेज़ एंड मींस एडवांस (WMA), विशेष आहरण सुविधा (SDF) और ओवरड्राफ्ट प्रमुख हैं, जिनकी शर्तें, सीमाएँ और ब्याज दरें अलग-अलग निर्धारित हैं।
वेज़ एंड मींस एडवांस (WMA): परिभाषा और विशेषताएँ
WMA एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें केंद्र सरकार को…
वेज़ एंड मींस एडवांस (WMA), विशेष आहरण सुविधा (SDF) और ओवरड्राफ्ट: आरबीआई की अल्पकालिक उधार प्रणाली
भारत में केंद्र और राज्य सरकारों के खर्च और आय में अक्सर अस्थायी असंतुलन उत्पन्न होता है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए आरबीआई द्वारा केंद्र और राज्य सरकारों को अल्पकालिक उधार की विशेष व्यवस्थाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। इन व्यवस्थाओं में वेज़ एंड मींस एडवांस (WMA), विशेष आहरण सुविधा (SDF) और ओवरड्राफ्ट प्रमुख हैं, जिनकी शर्तें, सीमाएँ और ब्याज दरें अलग-अलग निर्धारित हैं।
वेज़ एंड मींस एडवांस (WMA): परिभाषा और विशेषताएँ
WMA एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें केंद्र सरकार को आरबीआई से अल्पकालिक उधार लेने की सुविधा मिलती है। यह व्यवस्था वर्ष 1997 में आरबीआई द्वारा शुरू की गई थी। इस सुविधा के अंतर्गत केंद्र सरकार अधिकतम 91 दिनों के लिए उधार ले सकती है, जिसे निर्धारित समय सीमा के भीतर चुकाना अनिवार्य है।
- केवल केंद्र सरकार को उपलब्ध: राज्य सरकारें WMA का उपयोग नहीं कर सकतीं।
- अधिकतम अवधि: 91 दिन।
- उधार की सीमा: आरबीआई द्वारा पूर्व निर्धारित।
- ब्याज दर: रेपो दर के बराबर।
- सिक्योरिटी: केंद्र सरकार ट्रेजरी बिल (कोष पत्र) जारी करती है।
विशेष आहरण सुविधा (SDF): परिभाषा और विशेषताएँ
SDF राज्य सरकारों के लिए आरबीआई द्वारा उपलब्ध कराई गई अल्पकालिक उधार सुविधा है। राज्य सरकारें अपनी अल्पकालिक जरूरतों के लिए SDF के तहत उधार ले सकती हैं, लेकिन इसके लिए वे कोई अपनी प्रतिभूति जारी नहीं करतीं। वे केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों या गारंटी के आधार पर ही उधार लेती हैं।
- केवल राज्य सरकारों के लिए: केंद्र सरकार SDF का उपयोग नहीं करती।
- सिक्योरिटी: केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों में निवेश के आधार पर।
- ब्याज दर: रेपो दर से कम।
- सीमा: आरबीआई द्वारा निर्धारित अधिकतम सीमा तक।
ओवरड्राफ्ट: परिभाषा, शर्तें और ब्याज दर
ओवरड्राफ्ट वह सुविधा है जिसमें केंद्र या राज्य सरकारें अपनी निर्धारित WMA या SDF सीमा से अधिक उधार लेती हैं। यह एक असाधारण स्थिति है, जब सरकारों की अल्पकालिक जरूरतें निर्धारित सीमा से अधिक हो जाती हैं।
- दोनों सरकारों के लिए उपलब्ध: केंद्र और राज्य दोनों।
- शर्त: केवल तब जब WMA (केंद्र) या SDF (राज्य) की सीमा पूरी हो जाए।
- ब्याज दर: रेपो दर से अधिक।
- सीमा: आरबीआई द्वारा नियंत्रित।
ट्रेजरी बिल्स और प्रतिभूतियों की भूमिका
केंद्र सरकार अल्पकालिक उधार के लिए ट्रेजरी बिल्स (कोष पत्र) जारी करती है। ये प्रतिभूतियाँ अल्पकालिक होती हैं और इन्हीं के माध्यम से केंद्र सरकार WMA के तहत उधार लेती है। राज्य सरकारें स्वयं कोई अल्पकालिक प्रतिभूति जारी नहीं करतीं, बल्कि केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों में निवेश कर रखती हैं और उन्हीं के आधार पर SDF के तहत उधार लेती हैं।
- केंद्र सरकार: ट्रेजरी बिल्स जारी करती है।
- राज्य सरकार: केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों में निवेश के आधार पर SDF लेती है।
ब्याज दरों की तुलना
तीनों व्यवस्थाओं में ब्याज दरें अलग-अलग निर्धारित हैं। WMA में ब्याज दर रेपो दर के बराबर होती है, SDF में रेपो दर से कम और ओवरड्राफ्ट में रेपो दर से अधिक होती है। यह अंतर सरकारों को अनुशासित उधारी के लिए प्रेरित करता है।
| सुविधा | ब्याज दर का स्तर | कौन ले सकता है |
|---|---|---|
| WMA | रेपो दर के बराबर | केवल केंद्र सरकार |
| SDF | रेपो दर से कम | केवल राज्य सरकार |
| ओवरड्राफ्ट | रेपो दर से अधिक | केंद्र व राज्य दोनों |
सीमाएँ और शर्तें
प्रत्येक सुविधा के लिए आरबीआई द्वारा अधिकतम सीमा निर्धारित की जाती है। सरकारें अपनी-अपनी सीमा तक ही उधार ले सकती हैं। सीमा पूरी होने के बाद ही ओवरड्राफ्ट की अनुमति मिलती है, जिसमें ब्याज दर अधिक होती है।
- WMA सीमा: केंद्र सरकार के लिए निर्धारित।
- SDF सीमा: राज्य सरकार के लिए निर्धारित।
- ओवरड्राफ्ट: सीमा पार करने पर ही उपलब्ध।
प्रक्रिया और अनुशासन
सरकारों को अपनी अल्पकालिक वित्तीय जरूरतों के लिए पहले WMA (केंद्र) या SDF (राज्य) का उपयोग करना होता है। सीमा पूरी होने पर ही ओवरड्राफ्ट की अनुमति मिलती है। ब्याज दरों का अंतर सरकारों को अनुशासित उधारी के लिए प्रेरित करता है।
- केंद्र सरकार: पहले WMA, फिर ओवरड्राफ्ट।
- राज्य सरकार: पहले SDF, फिर ओवरड्राफ्ट।
- ब्याज दर अनुशासन: SDF < WMA = रेपो दर < ओवरड्राफ्ट।
परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण बिंदु
WMA, SDF और ओवरड्राफ्ट की अवधारणाएँ लोक वित्त, बजट और पब्लिक फाइनेंस के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। इनकी सीमाएँ, ब्याज दरें और पात्रता UPSC जैसी परीक्षाओं में बार-बार पूछी जाती हैं।
- WMA केवल केंद्र के लिए, SDF केवल राज्य के लिए।
- ओवरड्राफ्ट दोनों के लिए, लेकिन सीमा पार करने पर।
- ब्याज दरों का क्रम: SDF < WMA = रेपो दर < ओवरड्राफ्ट।
- राज्य सरकारें अपनी प्रतिभूति जारी नहीं करतीं, केंद्र की प्रतिभूति पर ही SDF लेती हैं।
- ट्रेजरी बिल्स केवल केंद्र सरकार जारी करती है।
संभावित प्रश्न और ट्रैप्स
इन व्यवस्थाओं में अक्सर परीक्षाओं में भ्रमित करने वाले प्रश्न पूछे जाते हैं, जैसे कि कौन सी सरकार कौन सी सुविधा ले सकती है, ब्याज दरों का स्तर क्या है, प्रतिभूतियों की भूमिका क्या है आदि।
- WMA में राज्य सरकार भाग नहीं ले सकती।
- SDF में केंद्र सरकार भाग नहीं ले सकती।
- ओवरड्राफ्ट में दोनों सरकारें भाग ले सकती हैं, लेकिन केवल अपनी-अपनी सीमा पूरी होने के बाद।
- राज्य सरकारें अपनी प्रतिभूति जारी नहीं करतीं, केंद्र की प्रतिभूति पर ही SDF लेती हैं।
- ब्याज दरों का क्रम याद रखें: SDF सबसे कम, ओवरड्राफ्ट सबसे अधिक।
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