The Hindu Analysis in Hindi 4th May - UPSC Current Affairs
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The Hindu Analysis in Hindi 4th May - UPSC Current Affairs
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समसामयिक विज्ञान, पर्यावरण एवं नीति
इमरजेंसी सेल ब्रॉडकास्टिंग अलर्ट सिस्टम: सचेत
भारत में हाल ही में इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम "सचेत" का पैन-इंडिया परीक्षण किया गया, जिसमें सभी मोबाइल फोनों पर एक साथ बीप और पॉप-अप वार्निंग मैसेज भेजा गया। यह प्रणाली प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाओं के दौरान त्वरित जन चेतावनी के लिए विकसित की गई है।
- सिस्टम का नाम: सचेत
- तकनीकी आधार: सेल ब्रॉडकास्टिंग (वन-टू-मेनी)
- संस्थाएँ: दूरसंचार विभाग, सी-डॉट, एनडीएमए
- विशेषताएँ: नेटवर्क कंजेशन को बाईपास करता है, जीपीएस/नंबर की आवश्यकता नहीं, मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट, रोमिंग यूजर्स को भी कवर करता है
सेल ब्रॉडकास्टिंग…
समसामयिक विज्ञान, पर्यावरण एवं नीति
इमरजेंसी सेल ब्रॉडकास्टिंग अलर्ट सिस्टम: सचेत
भारत में हाल ही में इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम "सचेत" का पैन-इंडिया परीक्षण किया गया, जिसमें सभी मोबाइल फोनों पर एक साथ बीप और पॉप-अप वार्निंग मैसेज भेजा गया। यह प्रणाली प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाओं के दौरान त्वरित जन चेतावनी के लिए विकसित की गई है।
- सिस्टम का नाम: सचेत
- तकनीकी आधार: सेल ब्रॉडकास्टिंग (वन-टू-मेनी)
- संस्थाएँ: दूरसंचार विभाग, सी-डॉट, एनडीएमए
- विशेषताएँ: नेटवर्क कंजेशन को बाईपास करता है, जीपीएस/नंबर की आवश्यकता नहीं, मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट, रोमिंग यूजर्स को भी कवर करता है
सेल ब्रॉडकास्टिंग तकनीक की कार्यप्रणाली
सेल ब्रॉडकास्टिंग में कंट्रोल रूम से लक्षित जियोफेंस्ड सेल टावर के माध्यम से क्षेत्र के सभी सक्रिय मोबाइल फोनों पर अलर्ट भेजा जाता है। यह प्रणाली जीएसएम आर्किटेक्चर पर आधारित है और नेटवर्क लोड या कंजेशन की समस्या को दरकिनार करती है।
- जीएसएम की फुल फॉर्म: ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल
- सेटिंग्स: फोन में वायरलेस इमरजेंसी अलर्ट चालू रहना चाहिए
- विशेष लाभ: साइलेंट/डीएनडी मोड में भी अलर्ट, डेटा/नंबर/जीपीएस की आवश्यकता नहीं
वैश्विक परिप्रेक्ष्य एवं ऐतिहासिक विकास
सेल ब्रॉडकास्टिंग की शुरुआत 1990 के दशक में यूरोप में हुई थी, 1997 में पेरिस में पहला सार्वजनिक प्रदर्शन हुआ। 2007 से भूकंप व सुनामी अलर्ट के लिए इसका उपयोग बढ़ा। अमेरिका ने 2012 से वायरलेस इमरजेंसी अलर्ट को अपनाया।
- संयुक्त राष्ट्र की पहल: अर्ली वार्निंग फॉर ऑल
- आईटीयू की सिफारिश: क्लाइमेट अडैप्टेशन के लिए अनुशंसित
- भारत में रोलआउट: सी-डॉट द्वारा, आत्मनिर्भर भारत के तहत
सेल ब्रॉडकास्टिंग बनाम पारंपरिक एसएमएस
सेल ब्रॉडकास्टिंग में वन-टू-मेनी संचार होता है, जबकि पारंपरिक एसएमएस वन-टू-वन होता है। सेल ब्रॉडकास्टिंग नेटवर्क कंजेशन को दरकिनार करता है, फोन नंबर या जीपीएस की आवश्यकता नहीं होती, और लाखों डिवाइस पर एक साथ अलर्ट भेज सकता है।
- पारंपरिक एसएमएस: नंबर/नेटवर्क पर निर्भर, कंजेशन की संभावना, डीएनडी/साइलेंट में मिस हो सकता है
- सेल ब्रॉडकास्ट: नेटवर्क लोड अप्रभावित, मल्टी-लैंग्वेज, रोमिंग यूजर्स कवर
चुनौतियाँ एवं सावधानियाँ
सेल ब्रॉडकास्टिंग के लिए नेटवर्क कवरेज, ग्रामीण/पहाड़ी क्षेत्रों में टावर कनेक्टिविटी, 19+ भारतीय भाषाओं में सटीक अनुवाद, और बिना पूर्व सूचना के पैनिक की संभावना जैसी चुनौतियाँ हैं। एनडीएमए ने परीक्षण से एक दिन पूर्व सूचना देकर मानसिक तैयारी सुनिश्चित की।
- लॉजिस्टिक चुनौती: हर भाषा में सटीक संदेश
- पैनिक की संभावना: अचानक बीप/सायरन से घबराहट
- समाधान: पूर्व सूचना (T-1 डे) द्वारा मानसिक स्वीकार्यता
ब्रेन डेथ: परिभाषा, परीक्षण एवं विवाद
ब्रेन डेथ वह स्थिति है जिसमें मस्तिष्क (ब्रेन स्टेम सहित) की सभी गतिविधियाँ अपरिवर्तनीय रूप से बंद हो जाती हैं। भारत में ब्रेन डेथ प्रमाणन के लिए मुख्यतः एपनिया टेस्ट (श्वसन प्रतिक्रिया) का उपयोग होता है, परंतु सुप्रीम कोर्ट ने इसकी पर्याप्तता पर प्रश्न उठाया है।
- ब्रेन डेथ: मस्तिष्क व ब्रेन स्टेम की सभी गतिविधियों का अपरिवर्तनीय ठहराव
- सर्कुलेटरी डेथ: हृदय की गति व श्वास का पूर्णतः बंद होना
- वर्तमान परीक्षण: एपनिया टेस्ट (श्वसन प्रतिक्रिया, डॉल्स आई रिफ्लेक्स)
- सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: ईईजी (इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम) व एंजियोग्राम भी अनिवार्य करने का सुझाव
ब्रेन डेथ प्रमाणन की प्रक्रिया एवं हितधारक
ब्रेन डेथ प्रमाणन के लिए चार सदस्यीय मेडिकल बोर्ड द्वारा 12 घंटे के अंतराल में दो बार नैदानिक परीक्षण किया जाता है। इसमें रिवर्सिबल कारणों (शराब, ड्रग्स, हाइपोथर्मिया) को खारिज किया जाता है। हितधारकों में स्वास्थ्य मंत्रालय, सुप्रीम कोर्ट, अस्पताल, डॉक्टर, और नागरिक शामिल हैं।
- मेडिकल बोर्ड: अस्पताल प्रभारी, न्यूरोलॉजिस्ट, उपचारकर्ता चिकित्सक
- परीक्षण: दो बार, 12 घंटे के अंतराल में
- रिवर्सिबल कारण: शराब, ड्रग्स, हाइपोथर्मिया को पहले खारिज करना आवश्यक
ब्रेन डेथ, अंगदान एवं सुप्रीम कोर्ट की सिफारिशें
ब्रेन डेथ की स्थिति में हृदय वेंटिलेटर सपोर्ट पर धड़कता रहता है, जिससे अंगदान के लिए आदर्श परिस्थिति बनती है। सुप्रीम कोर्ट ने ईईजी व एंजियोग्राम को भी प्रमाणन प्रक्रिया में शामिल करने की सिफारिश की है ताकि गलत प्रमाणन व ऑर्गन हार्वेस्टिंग की आशंका कम हो।
- ईईजी: मस्तिष्क के विद्युत संकेतों की जांच
- एंजियोग्राम: मस्तिष्क में रक्त प्रवाह की जांच (कंट्रास्ट डाई व एक्स-रे द्वारा)
- भारत में अंगदान: ब्रेन डेथ के मामलों में मात्र 0.77% लोग अंगदान करते हैं
बाघ संरक्षण, वहन क्षमता एवं मानव-बाघ संघर्ष
मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या 2014 में 308 से बढ़कर 2022 में 785 हो गई है, जिससे वहन क्षमता (कैरिंग कैपेसिटी) का मुद्दा उठा है। वहन क्षमता का निर्धारण मुख्यतः क्षेत्र में उपलब्ध शिकार (खुर वाले जानवरों) की संख्या पर निर्भर करता है।
- एक बाघ के लिए: 350 खुर वाले जानवर सालाना आवश्यक
- मानव मृत्यु: बाघों द्वारा मानव मृत्यु 224 से बढ़कर 418 (2025) प्रतिवर्ष
- संस्थाएँ: एनटीसीए, वाइल्ड लाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया, मध्य प्रदेश वन विभाग
बाघ संरक्षण की चुनौतियाँ एवं समाधान
बाघों की संख्या बढ़ने से कोर एरिया के बाहर विस्थापन, मानव-बाघ संघर्ष, मवेशियों पर निर्भरता, और प्रतिशोध में बाघों की हत्या जैसी समस्याएँ बढ़ी हैं। सड़क, रेल, खनन, वनों की कटाई से प्राकृतिक आवास का विखंडन भी एक बड़ी चुनौती है।
- कैरिंग कैपेसिटी: शिकार की उपलब्धता पर आधारित, न कि केवल क्षेत्रफल या जल पर
- मवेशी संकट: अभयारण्यों के अंदर मवेशियों की उपस्थिति बाघों की संख्या बढ़ाती है, बाहर मानव-बाघ संघर्ष का कारण
- समाधान: प्राकृतिक कॉरिडोर का निर्माण, डिग्रेडेड फॉरेस्ट का सुधार, रिटालिएटरी किलिंग्स पर नियंत्रण
एम-स्ट्राइप्स एवं बाघ निगरानी
एम-स्ट्राइप्स (Monitoring System for Tigers - Intensive Protection and Ecological Status) एक सॉफ्टवेयर आधारित निगरानी प्रणाली है, जिसे एनटीसीए ने 2010 में लांच किया। इसका उद्देश्य पेट्रोलिंग मार्गों की मैपिंग, अपराध रोकथाम, और बाघों के इकोलॉजिकल डाटा का प्रबंधन है।
- फुल फॉर्म: Monitoring System for Tigers - Intensive Protection and Ecological Status
- लॉन्च वर्ष: 2010
- उद्देश्य: पेट्रोलिंग, अपराध रोकथाम, इकोलॉजिकल डाटा प्रबंधन
प्रैक्टिस प्रश्न एवं परीक्षा उन्मुख बिंदु
- सेल ब्रॉडकास्टिंग: नेटवर्क कंजेशन को दरकिनार करता है, लाखों डिवाइस पर एक साथ अलर्ट भेज सकता है, जीपीएस/नंबर की आवश्यकता नहीं
- आईआरएनएसएस: क्षेत्रीय नववहन उपग्रह प्रणाली, भारत के लिए, शॉर्ट मैसेजिंग सुविधा उपलब्ध
- ब्रेन डेथ: ब्रेन स्टेम डेथ में हृदय वेंटिलेटर सपोर्ट पर चलता है, सर्कुलेटरी डेथ में हृदय बंद हो जाता है
- नोटोटो: स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन वैधानिक निकाय
- कैरिंग कैपेसिटी: मुख्यतः शिकार की उपलब्धता पर निर्भर, न कि केवल क्षेत्रफल/जल पर
- मानव-बाघ संघर्ष: बाघों की संख्या बढ़ने से संघर्ष में वृद्धि, कमी नहीं
तालिका: ब्रेन डेथ बनाम सर्कुलेटरी डेथ
| मापदंड | ब्रेन डेथ (Brain Death) | सर्कुलेटरी डेथ (Circulatory Death) |
|---|---|---|
| मस्तिष्क की स्थिति | पूर्णतः मृत | सक्रिय या मृत |
| हृदय की स्थिति | वेंटिलेटर सपोर्ट पर सक्रिय | पूर्णतः बंद |
| अंगदान | आदर्श परिस्थिति | सीमित विकल्प |
| प्रमाणन प्रक्रिया | एपनिया टेस्ट, ईईजी, एंजियोग्राम | हृदय गति व श्वास पूर्णतः बंद |
- ब्रेन डेथ में अंगदान के लिए सर्वोत्तम परिस्थिति होती है, जबकि सर्कुलेटरी डेथ में विकल्प सीमित रहते हैं।
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Question 1 of 10
निम्नलिखित संरक्षित क्षेत्रों पर विचार कीजिए:
मानस राष्ट्रीय उद्यान ओरंग राष्ट्रीय उद्यान नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्वउपर्युक्त में से कितने पिग्मी हॉग के प्राकृतिक आवास प्रदान करने के लिए जाने जाते हैं?
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