UMMEED HINDI One Shot NEET 2026 Biology - NEET Zoology
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UMMEED HINDI One Shot NEET 2026 Biology - NEET Zoology
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कोशिका: जीवन की इकाई
कोशिका जीवों की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है। सभी सजीव कोशिका या उसके उत्पादों से बने होते हैं। कोशिका के अध्ययन में भौतिक और रासायनिक प्रक्रियाओं का विश्लेषण न्यूनीकरण जीव विज्ञान (Reductionist Biology) कहलाता है। कोशिका की खोज, संरचना, प्रकार, विभाजन और चक्र से संबंधित बिंदु NEET परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
न्यूनीकरण जीव विज्ञान और प्रमुख वैज्ञानिक
न्यूनीकरण जीव विज्ञान में जीवों की भौतिक और रासायनिक प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। जी.एन. रामचंद्रन ने कोलेजन प्रोटीन की ट्रिपल हेलिक संरचना और रामचंद्रन प्लॉट दिया, जो प्रोटीन की संरचना के अध्ययन…
कोशिका: जीवन की इकाई
कोशिका जीवों की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है। सभी सजीव कोशिका या उसके उत्पादों से बने होते हैं। कोशिका के अध्ययन में भौतिक और रासायनिक प्रक्रियाओं का विश्लेषण न्यूनीकरण जीव विज्ञान (Reductionist Biology) कहलाता है। कोशिका की खोज, संरचना, प्रकार, विभाजन और चक्र से संबंधित बिंदु NEET परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
न्यूनीकरण जीव विज्ञान और प्रमुख वैज्ञानिक
न्यूनीकरण जीव विज्ञान में जीवों की भौतिक और रासायनिक प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। जी.एन. रामचंद्रन ने कोलेजन प्रोटीन की ट्रिपल हेलिक संरचना और रामचंद्रन प्लॉट दिया, जो प्रोटीन की संरचना के अध्ययन में उपयोगी है।
- कोलेजन: जंतुओं में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला प्रोटीन।
- रुबिस्को: पादपों में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला प्रोटीन।
- रामचंद्रन प्लॉट: प्रोटीन की अल्फा और बीटा संरचनाओं के लिए विकसित।
कोशिका की खोज, सिद्धांत और अपवाद
कोशिका की खोज का श्रेय रॉबर्ट हुक को (मृत कोशिका), सजीव कोशिका का अध्ययन एंटोन वॉन ल्यूवेनहॉक ने किया। कोशिका सिद्धांत स्लाइडिन (बॉटनिस्ट) और शॉन (जूलॉजिस्ट) ने 1838-39 में दिया।
- कोशिका सिद्धांत:
- सभी सजीव कोशिका या उसके उत्पादों से बने हैं।
- कोशिका संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है।
- नई कोशिकाओं का निर्माण पुरानी कोशिकाओं से होता है (रुडोल्फ वर्चो, 1855; Omnis cellula e cellula)।
- अपवाद: विषाणु, वायरॉइड्स (टीओ डायनर, 1971; आनुवांशिक पदार्थ: एकल रज्जु आरएनए, कम आणविक भार), प्रायों्स (असामान्य प्रोटीन)।
कोशिका के प्रकार: प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक
कोशिकाएं दो प्रकार की होती हैं: प्रोकैरियोटिक (असीम केंद्रीय) और यूकैरियोटिक (ससीम केंद्रीय)। प्रोकैरियोटिक कोशिका में विकसित केंद्रक, केंद्रक झिल्ली और केंद्रिका नहीं होती; यूकैरियोटिक में ये सभी होते हैं।
- प्रोकैरियोटिक उदाहरण: जीवाणु, आर्की जीवाणु, यू बैक्टीरिया, साइनो जीवाणु (नील हरित शैवाल), माइकोप्लाज्मा (PPLO)।
- यूकैरियोटिक उदाहरण: प्रॉटिस्टा, कवक, पादप, जंतु जगत।
- प्रोकैरियोटिक लक्षण:
- आनुवांशिक पदार्थ वृत्ताकार द्वरज्जुक डीएनए (न्यूक्लियोइड/केंद्रकाब), हिस्टोन प्रोटीन नहीं।
- झिल्लीबद्ध कोशिकांग अनुपस्थित; केवल झिल्ली रहित राइबोजोम (70s)।
- कोशिका आवरण: तीन परतें (ग्लाइकोलिक्स, कोशिका भित्ति, कोशिका झिल्ली)।
- ग्लाइकोलिक्स: मजबूत (कैप्सूल), ढीला (स्लाइम लेयर)।
- कोशिका भित्ति: पेप्टिडोग्लाइकेन (म्यूकोपेप्टाइड/म्यूरिन), ग्राम पॉजिटिव/नेगेटिव जीवाणु।
- कोशिका झिल्ली: प्रोकैरियोट्स और यूकैरियोट्स में समान।
- मीजोजोम्स: कोशिका भित्ति निर्माण, डीएनए प्रतिकृतकरण, श्वसन (माइटोकांड्रिया के समान)।
- क्रोमेटोफोर: प्रकाश संश्लेषी वर्णक।
- गमनांग: फ्लैजिला, रोम/झालड़ (पिलाए/फिमब्रे; चिपकने में सहायक)।
- प्लास्मिड डीएनए: अतिरिक्त वृत्ताकार डीएनए, एंटीबायोटिक प्रतिरोधकता।
- अंतविष्ट पिंड: संचित भोजन, गैस रिक्तिका (नील हरित शैवाल, पर्पल/हरे प्रकाश संश्लेषी जीवाणु; तैरने में सहायक)।
- साइज: माइकोप्लाज्मा (1-3 माइक्रों्स), जीवाणु (1-5 माइक्रों्स), विषाणु (0.02-0.2 माइक्रों्स)।
- जीवाणु के आकार: बेसिलस (छड़ी), कोकस (गोलाकार), विब्रियो (कोमा), सर्पीलाकार (स्पायरल)।
यूकैरियोटिक कोशिका की संरचना
यूकैरियोटिक कोशिका में विकसित केंद्रक, झिल्लीबद्ध कोशिकांग, हिस्टोन प्रोटीन, रेखित द्वरज्जुक डीएनए (गुणसूत्रों में), और 80s राइबोजोम होते हैं। कोशिका भित्ति पादपों में सेलुलोज, शैवाल में गैलेक्टेंस/मैनस/कैल्शियम कार्बोनेट/सिलिकॉन ऑक्साइड, कवक में काइटिन (एन एसिटाइल ग्लूकोस अमीन) से बनी होती है।
- मध्य पटलिका (Middle Lamella): कैल्शियम/मैग्नीशियम पेक्टेट से बनी, पादप कोशिकाओं को जोड़ती है।
- प्राथमिक भित्ति: पतली, सेलुलोज/हेमीसेल्यूलोज से बनी।
- द्वितीयक भित्ति: मोटी, लिग्निन की स्थूलन।
- प्लाज्मोडेस्माटा: पादप कोशिकाओं के बीच संयोजन, पदार्थों के स्थानांतरण में सहायक।
- गैप जंक्शन: जंतु कोशिका में संयोजन।
- कोशिका झिल्ली: तरल मोजेक मॉडल (सिंगर एंड निकोलसन, 1972), द्विपरत वसा (फास्फोलिपिड, ग्लाइकोलिपिड, कोलेस्ट्रॉल), प्रोटीन (अंगभूत/परिधय), शर्करा (कोशिका के बाहर), चयनात्मक पारगम्यता।
- कोशिकांग:
- द्वि झिल्ली युक्त: माइटोकांड्रिया, लवक (प्लास्टिड्स), केंद्रक।
- एकल झिल्ली युक्त: ईआर, गोलजीकाय, लयनकाय (लाइसोजोम्स), रसधानी (वैक्यूल्स), सूक्ष्म काय।
- झिल्ली रहित: राइबोजोम, तारक केंद्र (सेंट्रियोल्स; केवल जंतु कोशिका), केंद्रिका।
- माइटोकांड्रिया: जेनस ग्रीन से अभिरंजित, बाह्य/आंतरिक झिल्ली (अलग प्रोटीन/एंजाइम), मैट्रिक्स (वृत्ताकार द्वरज्जुक डीएनए, 70s राइबोजोम), क्रिस्टे (F0-F1 कण, ATP संश्लेषण), विखंडन द्वारा विभाजन, शक्ति घर, वायवीय श्वसन।
- लवक (Plastids): पादप/युग्लीनो में, बाह्य/आंतरिक झिल्ली, वृत्ताकार द्वरज्जुक डीएनए, 70s राइबोजोम, तीन प्रकार:
- ल्यूकोप्लास्ट (रंगहीन; भोजन संग्रह: अमाइलोप्लास्ट, इलाइयोप्लास्ट, एल्यूरोप्लास्ट)
- क्रोमोप्लास्ट (रंगीन; कैरोटिनोइड, जेंथोफिल्स)
- क्लोरोप्लास्ट (हरित; प्रकाश संश्लेषण, लंबाई 5-10 माइक्रोन, चौड़ाई 2-4 माइक्रोन, ग्रेना/थायलेकइड: प्रकाशीय अभिक्रिया, स्ट्रोमा: अप्रकाशीय अभिक्रिया)
- राइबोजोम: जॉर्ज पैलेड (1953), झिल्ली रहित, आरआरएनए/प्रोटीन से बना, 70s (जीवाणु, माइटोकांड्रिया, लवक), 80s (यूकैरियोट्स), प्रोटीन संश्लेषण।
- अंतः झिल्ली तंत्र: ईआर (RER: प्रोटीन संश्लेषण, SER: वसा/स्टेरॉइड्स/अविशाकरण), गोलजीकाय (कुंड/सिस्टर्न, सिस/ट्रांस सतह, पैकेजिंग/रूपांतरण, ग्लाइकोप्रोटीन/ग्लाइकोलिपिड निर्माण), लयनकाय (जल अपघट्य एंजाइम्स, पाचन, आत्मघाती थैले), रसधानी (जल, स्त्रावी/उत्सर्जी पदार्थ, टोनोप्लास्ट), फूड वैक्यूल/संकुचनशील रिक्तिका (अमीबा/प्रोटोजोआ में; जल/लवण संतुलन)।
- कोशिका पंजर (साइटोस्केलेटन): केवल यूकैरियोट्स में, तंतुमय प्रोटीन (सूक्ष्म तंतु, सूक्ष्म नलिकाएं, इंटरमीडिएट फिलामेंट्स), कोशिका की गति/आकार/यांत्रिक सहयोग, सूक्ष्म नलिकाएं (टिबुलिन प्रोटीन)।
- सीलिया/फ्लैजिला: यूकैरियोट्स में 9+2 सूक्ष्म नलिकाएं, गति में सहायक; सीलिया छोटे/अधिक, फ्लैजिला बड़े/कम।
- तारक केंद्र (सेंट्रियोल्स): जंतु कोशिका में, झिल्ली रहित, जोड़े में, 9+0 सूक्ष्म नलिकाएं, बैलगाड़ी के पहिए आकार, 90° पर, तरकु तंतु/स्पिंडल फाइबर निर्माण।
- केंद्रक: रॉबर्ट ब्राउन (1831), द्वि झिल्ली युक्त, पेरिन्यूक्लियर स्पेस (10-50 नैनोमीटर), न्यूक्लियर पोर्स (आरएनए बाहर, प्रोटीन अंदर), केंद्रक द्रव्य (क्रोमेटिन रेशे, झिल्ली रहित केंद्रिका), केंद्रिका (आरआरएनए संश्लेषण, राइबोजोम फैक्ट्री), क्रोमेटिन (डीएनए, हिस्टोन/गैर हिस्टोन प्रोटीन, आरएनए; यूक्रोमेटिन: सक्रिय, हेटेरोक्रोमेटिन: निष्क्रिय), क्रोमेटिन की खोज: फ्लेमिंग, अभिरंजन: एसीटोकारिन।
- गुणसूत्र: सेंट्रोमियर (प्राथमिक संकीर्णन क्षेत्र), चार प्रकार (मेटासेंट्रिक, सबमेटासेंट्रिक, एक्रोसेंट्रिक, टिलोसेंट्रिक), द्वितीयक संकीर्णन क्षेत्र (नर, 13, 14, 15, 21, 22), सेटेलाइट।
कोशिका चक्र और विभाजन
कोशिका चक्र में अंतरावस्था (इंटरफेस) और विभाजन अवस्था (एम फेज) होती है। अंतरावस्था में तैयारी (95% समय), विभाजन में कम समय (5%) लगता है। मानव कोशिका चक्र: 24 घंटे (22-23 घंटे तैयारी, 1-2 घंटे विभाजन), यीस्ट: 90 मिनट।
- अंतरावस्था: G1 (जीवन; आरएनए/प्रोटीन संश्लेषण), S (संश्लेषी; डीएनए प्रतिकृतकरण, हिस्टोन/तारक केंद्र गुणन), G2 (आरएनए/प्रोटीन संश्लेषण; टिबुलिन प्रोटीन), G0 (शांत; विभाजन नहीं, उपापचय सक्रिय; न्यूरॉन्स/हृदय कोशिकाएं जीवन भर G0 में), चेक पॉइंट्स (G1→S: डीएनए रिपेयर, G2→M: डीएनए प्रतिकृतकरण सत्यापन)।
- डीएनए प्रतिकृतकरण: S अवस्था में, गुणसूत्रों की संख्या 2n रहती है, क्रोमेटिड/डीएनए मात्रा 2C से 4C हो जाती है।
- प्रोकैरियोट्स में: G1, S, G2 अवस्थाएं नहीं; डीएनए प्रतिकृतकरण विभाजन से ठीक पहले।
समसूत्री विभाजन (माइटोसिस)
समसूत्री विभाजन कायिक कोशिकाओं में होता है; एक कोशिका से दो आनुवांशिक रूप से समान कोशिकाएं बनती हैं, गुणसूत्रों की संख्या समान रहती है।
- केंद्रक विभाजन (कैरियोकाइनेसिस): चार अवस्थाएं
- प्रोफेज: क्रोमेटिन रेशे संघनित होकर गुणसूत्र, तारक केंद्र विपरीत ध्रुवों की ओर, तरकु तंतु निर्माण, केंद्रक झिल्ली/केंद्रिका/ईआर/गोलजी विलुप्त।
- मेटाफेज: केंद्रक झिल्ली पूर्ण विघटन, गुणसूत्र मध्य पट्टी पर, तरकु तंतु काइनेटोकोर से जुड़े, टिबुलिन प्रोटीन/आरएनए से बने।
- एनाफेज: सेंट्रोमियर विघटन, सिस्टर क्रोमेटिड अलग-अलग, विपरीत ध्रुवों की ओर गति, अवस्था 4C से 2C2C।
- टिलोफेज: प्रोफेज का विपरीत, गुणसूत्र असंगनित, केंद्रक झिल्ली/केंद्रिका/ईआर/गोलजी पुनर्निर्मित।
- कोशिका द्रव्य विभाजन (साइटोकाइनेसिस):
- जंतु कोशिका: खांच/विदलन मेथड (प्लाज्मा झिल्ली बाहर से भीतर संकुचित)
- पादप कोशिका: कोशिका पट्टी/सेल प्लेट मेथड (गोलजीकाय से फ्रेग्मोप्लास्ट, मध्य पटलिका)
- महत्व: वृद्धि, भ्रूणीय विकास (विदलन), मरम्मत/घाव भरना, पुरानी कोशिकाओं का प्रतिस्थापन, केंद्रक कोशिका द्रव्य अनुपात बनाए रखना (कैरियोप्लाज्मिक इंडेक्स), बहु केंद्रक अवस्था (सिसाइटिकम), केंद्रक विभाजन बिना कोशिका द्रव्य विभाजन (नारियल पानी, भ्रूण कोष, बहुगुणिता/सहगुणिता)।
अर्धसूत्री विभाजन (मियोसिस)
मियोसिस लैंगिक जनन में युग्मक निर्माण के दौरान होता है; एक द्विगुणित कोशिका से चार अगुणित युग्मक बनते हैं, आनुवांशिक भिन्नता आती है।
- मियोसिस फर्स्ट: गुणसूत्रों की संख्या आधी (2n से n), आनुवांशिक भिन्नता (जीन विनिमय/क्रॉसिंग ओवर)
- मियोसिस सेकंड: गुणसूत्रों की संख्या सेम, माइटोसिस जैसा
- प्रोफेज वन: पांच उपवस्थाएं
- लेप्टोटीन: क्रोमेटिन रेशे संघनित होकर गुणसूत्र
- जाइगोटीन: समजात गुणसूत्र युग्मन (साइनेप्सिस), बायवेलेंट/टेट्राइड, साइनेप्टोनिमल संकुल
- पैकाइटिन: जीन विनिमय/पुनरयोजन (नॉन सिस्टर क्रोमेटिड्स, रिक्बिनेस एंजाइम)
- डिप्लोटीन: साइनेप्टोनिमल संकुल घुलना, कायज्माटा (एक्स आकार)
- डाईकाइनेसिस: उपांत भवन, कायज्माटा सिरे पर हटना
- मेटाफेज वन: समजात गुणसूत्र मध्य पट्टी पर
- एनाफेज वन: समजात गुणसूत्र पृथक्करण, सेंट्रोमियर विघटन नहीं
- इंटरकाइनेसिस: मियोसिस वन और टू के बीच, केवल G1/G2, S नहीं
- महत्व: पीढ़ी दर पीढ़ी गुणसूत्र संख्या स्थिर, आनुवांशिक भिन्नता, जैव विकास में योगदान
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु और प्रश्न
NEET में कोशिका संरचना और विभाजन से 3-4 प्रश्न आते हैं। स्टेटमेंट, मैच द कॉलम, सही/गलत, क्रम, पेयरिंग, कार्य, क्रम, विशेष अवस्थाएं, चेक पॉइंट्स, कोशिकांग, विभाजन के महत्व, आनुवांशिक भिन्नता, केंद्रक/कोशिका द्रव्य विभाजन, कोशिका भित्ति, राइबोजोम, मीजोजोम्स, क्रोमेटोफोर, प्लास्मिड डीएनए, अंतविष्ट पिंड, कोशिका चक्र, समसूत्री/अर्धसूत्री विभाजन, प्रोफेज वन की उपवस्थाएं, इंटरकाइनेसिस, कैरियोप्लाज्मिक इंडेक्स, सिसाइटिकम, बहुगुणिता, कोशिका पंजर, सीलिया/फ्लैजिला, तारक केंद्र, केंद्रक, क्रोमेटिन, गुणसूत्र, सेंट्रोमियर, काइनेटोकोर, तरकु तंतु, कोशिका पट्टी, फ्रेग्मोप्लास्ट, मध्य पटलिका, टोनोप्लास्ट, आत्मघाती थैले, फूड वैक्यूल, संकुचनशील रिक्तिका, सूक्ष्म काय, परऑक्सिजोम्स, ग्लाइयोऑक्सिजोम्स, कोशिका झिल्ली, तरल मोजेक मॉडल, वसा/प्रोटीन/शर्करा, चयनात्मक पारगम्यता, आरबीसी, कोलेस्ट्रॉल, लेसथिन, अंगभूत/परिधय प्रोटीन, शर्करा की स्थिति, कोशिका की तरलता, वसीय अम्ल, वाहक प्रोटीन, न्यूट्रल/ध्रुवीय विलय, मानव कारिकी, स्टेरॉइड हॉर्मोन, प्रोटीन संश्लेषण, आरआरएनए अनुलेखन, आरएनए पॉलीमरेज, 70s/80s राइबोजोम, स्वेडबर्ग इकाई, नैनोमीटर साइज, कोशिका का आकार/कार्य, सबसे बड़ी/छोटी/लंबी कोशिका, कोशिका के उदाहरण, पांच जगत वर्गीकरण, मोनेरा, प्रॉटिस्टा, कवक, पादप, जंतु, क्लमाइडोमोनास, क्लोरेला, प्रॉटिस्टा में स्थान, कोशिका के आकार/शेप, गैस रिक्तिका, तैरने में मदद, कोशिका द्रव्य, संचित भोजन, कोशिका आवरण, तीन परत, ग्लाइकोलिक्स, कैप्सूल/स्लाइम लेयर, कोशिका भित्ति, पेप्टिडोग्लाइकेन, म्यूरिन, ग्राम पॉजिटिव/नेगेटिव, कोशिका झिल्ली, मीजोजोम्स, क्रोमेटोफोर, फ्लैजिला, रोम/झालड़, प्लास्मिड डीएनए, अंतविष्ट पिंड, माइकोप्लाज्मा, जीवाणु, विषाणु, राइबोजोम, पॉलीजोम, एमआरएनए, प्रोटीन संश्लेषण, कोशिका चक्र, अंतरावस्था, विभाजन अवस्था, G1, S, G2, G0, चेक पॉइंट्स, डीएनए प्रतिकृतकरण, गुणसूत्र/क्रोमेटिड/डीएनए मात्रा, समसूत्री/अर्धसूत्री विभाजन, केंद्रक/कोशिका द्रव्य विभाजन, प्रोफेज/मेटाफेज/एनाफेज/टिलोफेज, कोशिका पट्टी, फ्रेग्मोप्लास्ट, मध्य पटलिका, मियोसिस वन/टू, प्रोफेज वन की पांच अवस्थाएं, जीन विनिमय, कायज्माटा, उपांत भवन, इंटरकाइनेसिस, जैव विकास, आनुवांशिक भिन्नता, पीढ़ी दर पीढ़ी गुणसूत्र संख्या स्थिर, NEET के लिए सभी बिंदु।
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Question 1 of 86
निम्नलिखित प्रत्येक लक्षण व्हिटेकर द्वारा प्रस्तावित एक जगत को निरूपित करता है। निम्नलिखित को शारीरिक संगठन की जटिलता के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करें।
A. काइटिन से बनी कोशिका भित्ति वाले बहुकोशिकीय परपोषी।
B. ऊतक/अंग/अंग तंत्र स्तर के शारीरिक संगठन वाले परपोषी।
C. पॉलीसेकेराइड और अमीनो अम्ल से बनी कोशिका भित्ति वाले प्रोकैरियोट।
D. ऊतक/अंग स्तर के शारीरिक संगठन वाले यूकैरियोटिक स्वपोषी।
E. कोशिकीय शारीरिक संगठन वाले यूकैरियोट।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
[2025]
Solution
C, E, A, D, B
आर.एच. व्हिटेकर द्वारा सुझाई गई पाँच जगत वर्गीकरण प्रणाली किस पर आधारित नहीं है:
[2014]
Solution
एक सुपरिभाषित केंद्रक की उपस्थिति या अनुपस्थिति
निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
[2022]
Solution
सायनोबैक्टीरिया जगत मोनेरा के अंतर्गत वर्गीकृत स्वपोषी जीवों का एक समूह है
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