Classification of Elements and Periodicity - NEET Chemistry
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Classification of Elements and Periodicity - NEET Chemistry
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तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता
तत्त्वों की ऐतिहासिक खोज और वर्गीकरण
तत्त्वों की खोज और वर्गीकरण में कई वैज्ञानिकों ने योगदान दिया। 1800 में 31 तत्त्व ज्ञात थे, 1865 में 63 तत्त्व, और 2015 में 118 तत्त्व ज्ञात हो गए। वर्गीकरण के प्रयासों में डोबर्नर के त्रिक, चैनोस की बेलनाकार सारणी, न्यूलैंड का अष्टक नियम, लोथरमेयर का वक्र, मेंडलीव की आवर्त सारणी और आधुनिक आवर्त सारणी प्रमुख हैं।
- डोबर्नर के त्रिक (1829): तीन-तीन तत्त्वों के समूह, बीच वाले तत्त्व का परमाणु भार अन्य दो के औसत के बराबर।
- न्यूलैंड का अष्टक नियम (1865): हर…
तत्त्वों का वर्गीकरण एवं गुणधर्मों में आवर्तिता
तत्त्वों की ऐतिहासिक खोज और वर्गीकरण
तत्त्वों की खोज और वर्गीकरण में कई वैज्ञानिकों ने योगदान दिया। 1800 में 31 तत्त्व ज्ञात थे, 1865 में 63 तत्त्व, और 2015 में 118 तत्त्व ज्ञात हो गए। वर्गीकरण के प्रयासों में डोबर्नर के त्रिक, चैनोस की बेलनाकार सारणी, न्यूलैंड का अष्टक नियम, लोथरमेयर का वक्र, मेंडलीव की आवर्त सारणी और आधुनिक आवर्त सारणी प्रमुख हैं।
- डोबर्नर के त्रिक (1829): तीन-तीन तत्त्वों के समूह, बीच वाले तत्त्व का परमाणु भार अन्य दो के औसत के बराबर।
- न्यूलैंड का अष्टक नियम (1865): हर आठवें तत्त्व के गुणधर्म समान, केवल कैल्शियम तक लागू।
- लोथरमेयर का वक्र: परमाणु आयतन और परमाणु भार के बीच ग्राफ, क्षार धातु शिखर पर, क्षारीय मृदा धातु अवरोही भाग में।
- मेंडलीव का आवर्त नियम: तत्त्वों के गुणधर्म परमाणु भार के आवर्ती फलन, कुछ तत्त्वों की भविष्यवाणी (गैलियम, जर्मेनियम), अपवाद—टेलुरियम और आयोडीन।
- आधुनिक आवर्त सारणी (मोजले, 1913): तत्त्वों के गुणधर्म परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन, परमाणु क्रमांक मूलभूत गुणधर्म।
आवर्त सारणी की संरचना और ब्लॉक
आधुनिक आवर्त सारणी में तत्त्वों को उनके परमाणु क्रमांक के अनुसार व्यवस्थित किया गया है। इसमें कुल 118 तत्त्व हैं, जिनका वर्गीकरण S, P, D, और F ब्लॉक में किया गया है।
S ब्लॉक: क्षार धातु (ग्रुप 1), क्षारीय मृदा धातु (ग्रुप 2; बेरिलियम अपवाद)
P ब्लॉक: ग्रुप 13–18; 15—निक्टोजन, 16—चालकोजन, 17—हैलोजन, 18—निष्क्रिय गैसें
D ब्लॉक: संक्रमण तत्व (जिंक, कैडमियम, मरकरी अपवाद)
F ब्लॉक: आंतरिक संक्रमण तत्व; लैंथेनॉइड (4f), एक्टिनॉइड (5f)
S और P ब्लॉक के तत्त्वों को प्रतिनिधि/मुख्य वर्ग के तत्त्व कहते हैं।
D ब्लॉक के तत्त्व संक्रमण तत्व, F ब्लॉक के तत्त्व आंतरिक संक्रमण तत्व।
यूरेनियम के बाद के तत्त्व कृत्रिम, नेप्चुनियम और प्लूटोनियम प्राकृतिक अयस्कों में पाए जाते हैं।
आवर्त संख्या, कक्षक और तत्त्वों की गणना
आवर्त संख्या उस आवर्त के तत्त्वों की उच्चतम मुख्य क्वांटम संख्या के बराबर होती है। किसी आवर्त में तत्त्वों की संख्या = 2 × उपलब्ध कक्षक।
- उदाहरण: चौथे आवर्त में 4s, 3d, 4p—कुल 9 कक्षक; तत्त्व।
- प्रत्येक आवर्त में भरे जाने वाले उपकोष:
- 1st: 1s
- 2nd: 2s, 2p
- 3rd: 3s, 3p
- 4th: 4s, 3d, 4p
- 5th: 5s, 4d, 5p
- 6th: 6s, 4f, 5d, 6p
- 7th: 7s, 5f, 6d, 7p
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और अपवाद
तत्त्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखने के लिए नोबल गैस शॉर्टकट विधि अपनाई जाती है। S ब्लॉक का अंतिम इलेक्ट्रॉन ns में, P ब्लॉक का ns2 np1–6, D ब्लॉक का n–1d1–10, F ब्लॉक का n–2f1–14।
- D ब्लॉक अपवाद: कॉपर, क्रोमियम, नायोबियम, मोलबेडिनियम, टेक्नीशियम, रुथेनियम, रोडियम, पैलेडियम, सिल्वर, प्लैटिनम, गोल्ड, रंजीनियम—इनमें इलेक्ट्रॉन जंप होता है।
- F ब्लॉक अपवाद: लैंथेनम, सीरियम, गैडोलेनियम, एक्टिनम, प्रोटेक्टिनियम, थोरियम, यूरेनियम, नेप्चुनियम, क्यूरियम—F से D में इलेक्ट्रॉन जंप।
परिरक्षण प्रभाव (शिल्डिंग) और प्रभावी नाभिकीय आवेश
परिरक्षण प्रभाव (σ) आंतरिक इलेक्ट्रॉनों द्वारा बाह्यतम इलेक्ट्रॉन पर प्रतिकर्षण है। प्रभावी नाभिकीय आवेश () = नाभिकीय आकर्षण (Z) – परिरक्षण प्रभाव (σ)। S > P > D > F में परिरक्षण प्रभाव; D और F में दुर्बल परिरक्षण, जिससे संक्रमण संकुचन (D) और लैंथेनॉइड संकुचन (F) होता है।
- आवर्त में डोमिनेंट, ग्रुप में σ डोमिनेंट।
- D/F इलेक्ट्रॉन के दुर्बल परिरक्षण से Z_{eff} प्रभावशाली हो जाता है।
परमाणु त्रिज्या: प्रकार, परिवर्तन और अपवाद
परमाणु त्रिज्या नाभिक से बाह्यतम कोष तक की दूरी है। मापना कठिन—अति सूक्ष्मता और अस्पष्ट सीमा के कारण। त्रिज्या के प्रकार:
सहसंयोजी त्रिज्या: दो सहसंयोजी परमाणुओं के नाभिकों के बीच की आधी दूरी (सिंगल बॉन्ड में)
धात्विक त्रिज्या: धात्विक बंध में दो परमाणुओं के नाभिकों के बीच की आधी दूरी
वांडरवाल त्रिज्या: अबंधित परमाणुओं के नाभिकों के बीच की आधी दूरी (ठोस अवस्था में, नोबल गैसों के लिए)
वांडरवाल > धात्विक > सहसंयोजी त्रिज्या
आवर्त में लेफ्ट टू राइट बढ़ता है, आकार घटता है; ग्रुप में ऊपर से नीचे कोषों की संख्या बढ़ती है, आकार बढ़ता है।
अपवाद: हाइड्रोजन-हीलियम, नोबल गैसों में वांडरवाल त्रिज्या के कारण आकार बढ़ता है।
D/F ब्लॉक में संकुचन कम; लैंथेनॉइड संकुचन (4f), एक्टिनॉइड संकुचन (5f)—5f में संकुचन अधिक।
आयनिक त्रिज्या और जल योजित त्रिज्या
आयनिक त्रिज्या में इलेक्ट्रॉन निकालने पर आकार घटता है, जोड़ने पर बढ़ता है। ऋणायन बड़ा, धनायन छोटा। सम इलेक्ट्रॉनिक प्रजातियों में अधिक ऋण आवेश, अधिक त्रिज्या।
- जल योजित त्रिज्या: पानी में छोटे आयन के आसपास बड़ी जल परत बनती है, जिससे जल योजित त्रिज्या बढ़ जाती है।
- जल योजित त्रिज्या का क्रम गैसीय अवस्था के आयनिक आकार के उल्टा होता है; गतिशीलता छोटे आयन में अधिक।
आयनन ऊर्जा (Ionization Energy) और अपवाद
आयनन ऊर्जा: गैसीय परमाणु से बाह्यतम इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा। आयनन ऊर्जा आकार के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
- आवर्त में लेफ्ट टू राइट आयनन ऊर्जा बढ़ती है; ग्रुप में ऊपर से नीचे घटती है।
- नोबल गैसों की आयनन ऊर्जा सर्वाधिक।
- अपवाद: बेरिलियम > बोरॉन (भेदन क्षमता), नाइट्रोजन > ऑक्सीजन (प्रतिकर्षण), थैलियम > इंडियम (लैंथेनॉइड संकुचन)
- D ब्लॉक में आयनन ऊर्जा का क्रम ट्रिक से याद: Scorpio Verna CRTA थी मन नहीं किया क्योंकि Ferrari में जान।
- क्रमागत आयनन ऊर्जा हमेशा बढ़ती है; बड़ा जंप नोबल गैस विन्यास से इलेक्ट्रॉन निकालने पर।
इलेक्ट्रॉन लब्धि ऊर्जा (Electron Gain Enthalpy) और इलेक्ट्रॉन बंधुता
इलेक्ट्रॉन लब्धि ऊर्जा (): गैसीय परमाणु में इलेक्ट्रॉन जोड़ने पर मुक्त हुई ऊर्जा, सामान्यतः ऋणात्मक। इलेक्ट्रॉन बंधुता (EA) = ; EA पॉजिटिव, अपवादों में शून्य।
- अपवाद: बेरिलियम, मैग्नीशियम, नाइट्रोजन, सात नोबल गैसें—इनकी EA शून्य।
- इलेक्ट्रॉन लब्धि ऊर्जा आकार के व्युत्क्रमानुपाती।
- ग्रुप 16, 17, 18 में पहला सदस्य (ऑक्सीजन, फ्लोरीन, हीलियम) में प्रतिकर्षण के कारण EA कम।
- क्लोरीन की EA पूरी आवर्त सारणी में सर्वाधिक।
विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) और अनुप्रयोग
विद्युत ऋणात्मकता: बंधित इलेक्ट्रॉन युग्म को आकर्षित करने की क्षमता। अमापनीय, मात्रकहीन, स्थिर नहीं, बंधित परमाणु पर निर्भर।
- ऑक्सीकरण अवस्था के समानुपाती, S करैक्टर के समानुपाती।
- आकार के व्युत्क्रमानुपाती।
- ग्रुप 13, 14 में लैंथेनॉइड संकुचन के कारण अपवाद।
- बंध ध्रुवणता EN के अंतर के समानुपाती; अंतर > 1.8 आयनिक, ≤ 1.8 सहसंयोजी।
संयोजकता, ऑक्सीकरण अवस्था और असंगत व्यवहार
संयोजकता (Valency): तत्त्व की बंध बनाने की क्षमता, सबसे अभिलक्षणिक गुणधर्म। ऑक्सीकरण अवस्था: यौगिक में परमाणु पर उत्पन्न आवेश, EN के आधार पर।
- सेकंड पीरियड के तत्त्व (लिथियम, बेरिलियम, बोरॉन, कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, फ्लोरीन) असंगत व्यवहार दिखाते हैं—छोटा आकार, उच्च आवेश/त्रिज्या अनुपात, वेकेंट d ऑर्बिटल नहीं।
- सेकंड पीरियड के तत्त्व अधिकतम चार बॉन्ड बना सकते हैं; पाई बॉन्ड बनाने की प्रवृत्ति अधिक।
रासायनिक क्रियाशीलता, धात्विक/अधात्विक गुणधर्म और ऑक्साइडों की प्रकृति
रासायनिक क्रियाशीलता ऑक्सीजन और हैलोजन के साथ अभिक्रिया द्वारा सर्वोत्तम रूप से दर्शाई जाती है। सारणी के छोरों पर क्रियाशीलता उच्चतम, केंद्र में न्यूनतम।
- लेफ्ट टू राइट: अधात्विक गुण बढ़ते हैं, धात्विक घटते हैं।
- ऊपर से नीचे: धात्विक गुण बढ़ते हैं, अधात्विक घटते हैं; D ब्लॉक में अपवाद।
- ऑक्साइडों के प्रकार:
- उदासीन: NO, N2O, CO
- उभयधर्मी: H2O, BeO, ZnO, Al2O3, Sb2O3, As2O3, Ga2O3, PbO, PbO2, SnO, SnO2, Mn2O3, MnO2, Cr2O3, CrO2, V2O5
- क्षारीय: धातुओं के ऑक्साइड
- अम्लीय: अधातुओं के ऑक्साइड; अपवाद—Mn2O7, CrO3 (धातु के ऑक्साइड होते हुए भी अम्लीय)
- ऑक्सीकरण अवस्था बढ़ने पर अम्लीयता बढ़ती है; अधात्विक गुण बढ़ने पर अम्लीयता बढ़ती है; धात्विक गुण बढ़ने पर क्षारीयता बढ़ती है।
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130 QuestionsClick on an option to find the answer
Question 1 of 130
तत्वों का कौन सा समुच्चय कैल्कोजन परिवार से संबंधित है:
Solution
O, S, Se
Solution
निम्न में से तत्वों का कौनसा समूह न्यूलैंड के अष्टक नियम का अनुसरण करता है?
Solution
PYQs
44 QuestionsClick on an option to find the answer
Question 1 of 44
निम्नलिखित ऐलिफैटिक अम्लों की अम्लीयता का घटता हुआ सही क्रम है:
[2025]
Solution
HCOOH > CH3COOH > (CH3)2CHCOOH > (CH3)3CCOOH
निम्नलिखित अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद है:

[2025]
Solution

निम्नलिखित रूपांतरण के लिए उपयुक्त अभिकर्मक को पहचानिए।

[2025]
Solution
(i) AlH(iBu)2 (ii) H2O
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