Post Independence - Class 12 Boards Political Science
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Post Independence - Class 12 Boards Political Science
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कांग्रेस प्रणाली की चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना
राजनीतिक उत्तराधिकार की चुनौती
नेहरू की मृत्यु (1964) के बाद भारत में राजनीतिक उत्तराधिकार का प्रश्न गंभीर रूप से उठा। लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थिरता पर संदेह था क्योंकि कई नवस्वतंत्र देशों में सत्ता का हस्तांतरण लोकतांत्रिक ढंग से नहीं हो पाया था। भारत में शास्त्री को प्रधानमंत्री चुना गया, जिन्होंने 1964 से 1966 तक पद संभाला।
- शास्त्री के सामने दो प्रमुख चुनौतियाँ थीं: चीन युद्ध (1962) के बाद आर्थिक संकट और 1965 में पाकिस्तान से युद्ध।
- मानसून की असफलता, सूखा, खाद्यान्न संकट, मुद्रा भंडार में कमी जैसी समस्याएँ थीं। -…
कांग्रेस प्रणाली की चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना
राजनीतिक उत्तराधिकार की चुनौती
नेहरू की मृत्यु (1964) के बाद भारत में राजनीतिक उत्तराधिकार का प्रश्न गंभीर रूप से उठा। लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थिरता पर संदेह था क्योंकि कई नवस्वतंत्र देशों में सत्ता का हस्तांतरण लोकतांत्रिक ढंग से नहीं हो पाया था। भारत में शास्त्री को प्रधानमंत्री चुना गया, जिन्होंने 1964 से 1966 तक पद संभाला।
- शास्त्री के सामने दो प्रमुख चुनौतियाँ थीं: चीन युद्ध (1962) के बाद आर्थिक संकट और 1965 में पाकिस्तान से युद्ध।
- मानसून की असफलता, सूखा, खाद्यान्न संकट, मुद्रा भंडार में कमी जैसी समस्याएँ थीं।
- शास्त्री ने "जय जवान जय किसान" का नारा दिया।
- ताशकंद समझौते के दौरान शास्त्री की मृत्यु (10 जनवरी 1966) के बाद गुलजारीलाल नंदा कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने।
- पुनः उत्तराधिकार का संकट उत्पन्न हुआ, जिसका समाधान इंदिरा गांधी के चयन से हुआ।
इंदिरा गांधी का उदय और नेतृत्व
इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। उनका चयन निर्विवाद नहीं था; मोरारजी देसाई भी दावेदार थे। इंदिरा गांधी को शुरुआत में वरिष्ठ नेताओं (सिंडिकेट) का समर्थन नहीं मिला, परंतु गुप्त मतदान में दो-तिहाई सांसदों ने उनका समर्थन किया।
- इंदिरा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया, कांग्रेस अध्यक्ष (1958) रहीं, शास्त्री मंत्रिमंडल में सूचना प्रसारण मंत्री थीं।
- 1967, 1971, 1980 के चुनावों में कांग्रेस को विजय दिलाई।
- "गरीबी हटाओ" का नारा दिया।
- 1971 के युद्ध में निर्णायक भूमिका निभाई, बांग्लादेश का निर्माण हुआ।
- बैंकों का राष्ट्रीयकरण, प्रिवी पर्स की समाप्ति, आणविक परीक्षण, पर्यावरण संरक्षण जैसे निर्णय लिए।
- 31 अक्टूबर 1984 को उनकी हत्या कर दी गई।
1967 का चौथा आम चुनाव: परिस्थितियाँ और परिणाम
1967 के आम चुनाव में कांग्रेस के प्रभुत्व को पहली बार गंभीर चुनौती मिली। चुनाव के समय राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट, मानसून की असफलता, सूखा, मुद्रा भंडार में कमी, महंगाई, बेरोजगारी जैसी समस्याएँ थीं।
- इंदिरा गांधी ने रुपए का अवमूल्यन किया: से ।
- आर्थिक संकट के कारण हड़तालें, आंदोलन, बैंड बढ़े।
- सरकार ने इन आंदोलनों को कानून-व्यवस्था की समस्या बताया।
- साम्यवादी और समाजवादी दलों ने संघर्ष तेज किया।
- चौथे आम चुनाव के परिणाम को "राजनीतिक भूकंप" कहा गया।
- कांग्रेस को केंद्र में बहुमत मिला, परंतु सात राज्यों में बहुमत नहीं मिला, दो में सरकार नहीं बना पाई।
- दिल्ली से हावड़ा तक कोई कांग्रेस शासित राज्य नहीं बचा था।
गैर कांग्रेसवाद और गठबंधन राजनीति
कांग्रेस के कमजोर पड़ने पर विपक्षी दलों ने "गैर कांग्रेसवाद" की रणनीति अपनाई। राम मनोहर लोहिया ने यह अवधारणा दी कि सभी गैर कांग्रेसी दल एकजुट हों ताकि कांग्रेस को सत्ता से हटाया जा सके।
- गैर कांग्रेसवाद का उद्देश्य: कांग्रेस के वर्चस्व को तोड़ना।
- सभी विचारधाराओं के दल एक साथ आए, भले ही उनके कार्यक्रम अलग हों।
- कांग्रेस के भीतर आंतरिक कलह और अनुभवहीन नेतृत्व के कारण विपक्ष को बल मिला।
- गठबंधन सरकारें बनीं, परंतु वे अधिक समय तक स्थिर नहीं रह सकीं।
- संयुक्त विधायक दल (संयुक्त मोर्चा) का गठन हुआ।
- दलबदल (defection) की समस्या गंभीर हुई—हरियाणा, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश में सरकारें गिरीं।
- "आया राम, गया राम" मुहावरा इसी समय प्रचलित हुआ।
दलबदल विरोधी कानून (एंटी डिफेक्शन लॉ)
दलबदल की समस्या को रोकने के लिए 1985 में संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल विरोधी कानून लाया गया। इसका उद्देश्य राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना था।
- 52वां संविधान संशोधन (1985) के तहत लागू।
- प्रारंभ में 1/3 सदस्य दलबदल करते तो विलय माना जाता था।
- 91वां संविधान संशोधन (2003) के बाद 2/3 सदस्य दलबदल करें तो ही विलय माना जाएगा।
- दलबदल करने वाले सदस्यों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
कांग्रेस में विभाजन: इंदिरा बनाम सिंडिकेट
1967 के चुनाव के बाद कांग्रेस में आंतरिक संघर्ष बढ़ा। वरिष्ठ नेताओं (सिंडिकेट) का समूह संगठन पर नियंत्रण चाहता था, जबकि इंदिरा गांधी स्वतंत्र निर्णय लेना चाहती थीं।
- सिंडिकेट: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, संगठन पर नियंत्रण।
- इंदिरा गांधी ने पार्टी के बाहर के लोगों को सलाहकार बनाया, मंत्रिमंडल में शामिल किया।
- 1967 में इंदिरा गांधी ने 10 सूत्रीय कार्यक्रम लागू किया—गरीबों के लिए अनाज, भूमि सुधार, बैंकों का राष्ट्रीयकरण, सामाजिक नियंत्रण आदि।
- सिंडिकेट इन कार्यक्रमों से असहमत था।
- राष्ट्रपति चुनाव (1969) में इंदिरा गांधी ने वी.वी. गिरी का समर्थन किया, सिंडिकेट ने नीलम संजीव रेड्डी का।
- वी.वी. गिरी की जीत के बाद सिंडिकेट ने इंदिरा गांधी को कांग्रेस से निष्कासित कर दिया।
- कांग्रेस दो भागों में बँट गई: इंदिरा गांधी की "नई कांग्रेस" (Requisition) और सिंडिकेट की "पुरानी कांग्रेस" (Organization)।
- इंदिरा गांधी ने इसे विचारधारा का संघर्ष बताया—नई कांग्रेस समाजवादी, पुरानी कांग्रेस पुरातनपंथी।
प्रिवी पर्स की समाप्ति
स्वतंत्रता के बाद देसी रियासतों के विलय के समय पूर्व राजाओं को विशेष अधिकार (प्रिवी पर्स) दिए गए थे। इंदिरा गांधी ने इन विशेषाधिकारों को समाप्त करने का निर्णय लिया।
- प्रिवी पर्स: पूर्व राजाओं को दी जाने वाली पेंशन/विशेष भत्ते।
- संविधान संशोधन के प्रयास 1970 में हुए, सुप्रीम कोर्ट ने अध्यादेश निरस्त किया।
- 1971 के चुनाव में इंदिरा गांधी ने प्रिवी पर्स की समाप्ति को मुद्दा बनाया।
- मोरारजी देसाई ने इसे नैतिक रूप से गलत माना।
- इंदिरा गांधी की लोकप्रियता इस निर्णय से बढ़ी।
1971 का आम चुनाव और कांग्रेस की पुनर्स्थापना
1971 के चुनाव में कांग्रेस दो भागों में बँटी थी—इंदिरा गांधी की नई कांग्रेस और सिंडिकेट की पुरानी कांग्रेस। विपक्ष ने "ग्रैंड एलायंस" बनाया, जिसका मुख्य नारा "इंदिरा हटाओ" था, जबकि इंदिरा गांधी ने "गरीबी हटाओ" का सकारात्मक नारा दिया।
- तीन मुख्य पक्ष: पुरानी कांग्रेस (सिंडिकेट), नई कांग्रेस (इंदिरा गांधी), ग्रैंड एलायंस।
- ग्रैंड एलायंस के पास कोई ठोस कार्यक्रम नहीं था।
- चुनाव परिणाम: नई कांग्रेस को 352 सीटें (44% वोट), कुल गठबंधन को 375 सीटें (48% वोट), पुरानी कांग्रेस को केवल 16 सीटें।
- इंदिरा गांधी की लोकप्रियता और कार्यक्रमों के कारण कांग्रेस की पुनर्स्थापना हुई।
कांग्रेस प्रणाली की प्रकृति में परिवर्तन
1971 के बाद कांग्रेस प्रणाली पुनर्स्थापित तो हुई, परंतु उसकी प्रकृति बदल गई। पहले कांग्रेस संगठनात्मक रूप से मजबूत थी, विभिन्न विचारधाराओं को समाहित करती थी, अब वह एक नेता (इंदिरा गांधी) की लोकप्रियता पर आधारित हो गई।
- संगठनात्मक ढांचा कमजोर हुआ, सामाजिक आधार बदल गया।
- दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, भूमिहीन किसान कांग्रेस के नए आधार बने।
- पहले कांग्रेस में विभिन्न मत और हितों को समाहित करने की क्षमता थी, अब वह घट गई।
- इंदिरा गांधी की छवि एक मजबूत राष्ट्रवादी नेता के रूप में उभरी।
- 1971 के युद्ध में निर्णायक भूमिका ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया।
परीक्षा के लिए मुख्य बिंदु
- नेहरू के बाद राजनीतिक उत्तराधिकार का संकट लोकतांत्रिक ढंग से सुलझा।
- शास्त्री के समय चीन युद्ध के बाद आर्थिक संकट, 1965 का पाकिस्तान युद्ध, "जय जवान जय किसान"।
- इंदिरा गांधी का उदय, गुप्त मतदान से चयन, वरिष्ठ नेताओं का विरोध।
- 1967 का आम चुनाव: कांग्रेस का प्रभुत्व टूटा, गठबंधन सरकारें, दलबदल की समस्या।
- गैर कांग्रेसवाद की अवधारणा, राम मनोहर लोहिया की भूमिका।
- दलबदल विरोधी कानून: 52वां संविधान संशोधन (1985), 91वां संशोधन (2003)।
- कांग्रेस में विभाजन: इंदिरा बनाम सिंडिकेट, 10 सूत्रीय कार्यक्रम, राष्ट्रपति चुनाव विवाद।
- प्रिवी पर्स की समाप्ति, समाजवादी रंग।
- 1971 का चुनाव: "गरीबी हटाओ" बनाम "इंदिरा हटाओ", नई कांग्रेस की विजय।
- कांग्रेस प्रणाली की प्रकृति में बदलाव—व्यक्तिगत लोकप्रियता, संगठनात्मक कमजोरी, सामाजिक आधार में परिवर्तन।
महत्वपूर्ण तथ्य और तिथियाँ
- नेहरू की मृत्यु: 1964
- शास्त्री का कार्यकाल: 1964-1966
- ताशकंद समझौता और शास्त्री की मृत्यु: 10 जनवरी 1966
- इंदिरा गांधी का प्रधानमंत्री बनना: 1966
- चौथा आम चुनाव: 1967
- रुपए का अवमूल्यन: 1966 ( से )
- कांग्रेस विभाजन: 1969
- राष्ट्रपति चुनाव विवाद: 1969 (वी.वी. गिरी बनाम नीलम संजीव रेड्डी)
- प्रिवी पर्स समाप्ति का मुद्दा: 1970-71
- 1971 का आम चुनाव: फरवरी 1971
- बांग्लादेश युद्ध: 1971
- दलबदल विरोधी कानून: 1985 (52वां संविधान संशोधन), 2003 (91वां संशोधन)
- इंदिरा गांधी की हत्या: 31 अक्टूबर 1984
परीक्षा के संभावित प्रश्न
1967 के आम चुनाव के दौरान प्रमुख समस्याएँ क्या थीं?
गैर कांग्रेसवाद की अवधारणा किसने दी और उसका उद्देश्य क्या था?
दलबदल विरोधी कानून के प्रमुख प्रावधान क्या हैं?
कांग्रेस में विभाजन के कारण और परिणाम स्पष्ट करें।
प्रिवी पर्स की समाप्ति का औचित्य और प्रभाव।
1971 के चुनाव में कांग्रेस की विजय के कारण।
कांग्रेस प्रणाली की प्रकृति में आए बदलावों का विश्लेषण करें।
जय जवान जय किसान (शास्त्री)
गरीबी हटाओ (इंदिरा गांधी)
इंदिरा हटाओ (ग्रैंड एलायंस)
सिंडिकेट: कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का समूह, संगठन पर नियंत्रण।
दलबदल: निर्वाचित सदस्य का पार्टी बदलना।
गैर कांग्रेसवाद: कांग्रेस के विरुद्ध सभी दलों का एकजुट होना।
1970 के दशक में इंदिरा गांधी की लोकप्रियता के कारण: गरीबी हटाओ, बैंकों का राष्ट्रीयकरण, प्रिवी पर्स की समाप्ति, निर्णायक नेतृत्व।
सिंडिकेट का अर्थ: कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का समूह, संगठन पर नियंत्रण।
1969 में कांग्रेस का विभाजन: विचारधारा का संघर्ष, राष्ट्रपति चुनाव विवाद, संगठन बनाम नेतृत्व।
राष्ट्रपति चुनाव (1969): इंदिरा गांधी ने वी.वी. गिरी का समर्थन किया, सिंडिकेट ने नीलम संजीव रेड्डी का।
10 सूत्रीय कार्यक्रम: गरीबों के लिए अनाज, भूमि सुधार, बैंकों का राष्ट्रीयकरण, सामाजिक नियंत्रण आदि।
कांग्रेस प्रणाली की पुनर्स्थापना के बावजूद उसकी प्रकृति बदल गई—अब वह एक नेता की लोकप्रियता पर आधारित थी, संगठनात्मक समावेशिता कम हो गई, सामाजिक आधार बदला।
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