BIOTECHNOLOGY AND ITS APPLICATIONS - Class 12 Boards Biology
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BIOTECHNOLOGY AND ITS APPLICATIONS - Class 12 Boards Biology
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जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके अनुप्रयोग
जैव प्रौद्योगिकी की मूल अवधारणा
जैव प्रौद्योगिकी वह विज्ञान है जिसमें आनुवांशिक रूप से रूपांतरित सूक्ष्म जीव, फफूंद, पादप और जंतु कोशिकाओं का उपयोग कर जैविक उत्पादों का औद्योगिक स्तर पर उत्पादन किया जाता है। इसमें वांछित जीन को किसी जीव में प्रविष्ट कर उसे जेनेटिकली मॉडिफाई किया जाता है, जिससे बायोफार्मास्यूटिकल्स और अन्य जैविक उत्पाद बनाए जाते हैं।
- मुख्य उपयोग: चिकित्सा, निदान, कृषि, संसाधित खाद्य, जैव सुधार (बायोरेमेडिएशन), अपशिष्ट प्रबंधन, ऊर्जा उत्पादन।
- बायोरेमेडिएशन उदाहरण: सडोमोनास पुटिडा जीवाणु, टोल प्लाज्मिड (आनंद मोहन चक्रवर्ती द्वारा खोज)।
जैव प्रौद्योगिकी में अनुसंधान के…
जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके अनुप्रयोग
जैव प्रौद्योगिकी की मूल अवधारणा
जैव प्रौद्योगिकी वह विज्ञान है जिसमें आनुवांशिक रूप से रूपांतरित सूक्ष्म जीव, फफूंद, पादप और जंतु कोशिकाओं का उपयोग कर जैविक उत्पादों का औद्योगिक स्तर पर उत्पादन किया जाता है। इसमें वांछित जीन को किसी जीव में प्रविष्ट कर उसे जेनेटिकली मॉडिफाई किया जाता है, जिससे बायोफार्मास्यूटिकल्स और अन्य जैविक उत्पाद बनाए जाते हैं।
- मुख्य उपयोग: चिकित्सा, निदान, कृषि, संसाधित खाद्य, जैव सुधार (बायोरेमेडिएशन), अपशिष्ट प्रबंधन, ऊर्जा उत्पादन।
- बायोरेमेडिएशन उदाहरण: सडोमोनास पुटिडा जीवाणु, टोल प्लाज्मिड (आनंद मोहन चक्रवर्ती द्वारा खोज)।
जैव प्रौद्योगिकी में अनुसंधान के क्षेत्र
जैव प्रौद्योगिकी में अनुसंधान के तीन मुख्य क्षेत्र हैं, जिनमें उत्प्रेरक (एंजाइम) का निर्माण, उत्प्रेरक के लिए सर्वोत्तम परिस्थितियों की खोज, और उत्पादों की डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग शामिल है।
- उत्प्रेरक निर्माण: सर्वोत्तम एंजाइम या सूक्ष्म जीवों का चयन।
- सर्वोत्तम परिस्थितियाँ: तापमान, पीएच आदि की पहचान।
- डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग: उत्पाद का पृथक्करण, शोधन, क्वालिटी कंट्रोल।
कृषि में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग
कृषि में खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए तीन विधियाँ हैं: रसायन आधारित कृषि, कार्बनिक कृषि, और अनुवांशिकता रूपांतरित फसलें। हरित क्रांति (ग्रीन रिवोल्यूशन) ने उत्पादन तीन गुना तक बढ़ाया, परंतु बढ़ती जनसंख्या की मांग पूरी नहीं कर सकी।
- रसायन आधारित कृषि: पेस्टिसाइड्स, वीडीसाइड्स का उपयोग; साइड इफेक्ट्स—पानी, मिट्टी प्रदूषण, महंगा।
- कार्बनिक कृषि: रसायन रहित, अधिक मेहनत, महंगी फसलें।
- जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलें: वांछित जीन डालकर केवल वांछित लक्षण, उच्च उत्पादकता, पर्यावरण के लिए बेहतर।
ऊतक संवर्धन एवं माइक्रोप्रोपगेशन
उतक संवर्धन (टिश्यू कल्चर) तकनीक में किसी पौधे के एक्सप्लांट (कर्तोतकी) को पोषक माध्यम में रखकर संपूर्ण पौधा विकसित किया जाता है। इससे कम समय में हजारों पौधे बनाए जा सकते हैं, जो एक-दूसरे के क्लोन (सोमास) होते हैं।
- पोषक माध्यम में आवश्यक तत्व: सुक्रोज, विटामिन्स, ऑक्सिन्स, साइटोकाइनिन्स, इनऑर्गेनिक साल्ट्स, अमीनो एसिड्स।
- माइक्रोप्रोपगेशन: एक एक्सप्लांट से हजारों पौधे, सभी जेनेटिकली समान।
- रोगमुक्त पौधे: डिजीज्ड पौधों के अपाइकल/एग्जिलरी मेरिस्टेम से स्वस्थ पौधे।
- सोमेटिक हाइब्रिडाइजेशन: दो पौधों के प्रोटोप्लास्ट को मिलाकर नया हाइब्रिड (जैसे टोमेटो + पोटैटो = पोमैटो)।
जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म्स (GMOs) के लाभ
GMOs वे जीव हैं जिनके जीन मानव द्वारा बदले गए हैं। इनका व्यवहार स्थानांतरित जीन की प्रकृति, पौधे/जंतु की प्रजाति और खाद्य जाल में स्थिति पर निर्भर करता है।
- एबायोटिक स्ट्रेस सहनशीलता: सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि आदि में अधिक सहनशील।
- कीटनाशक की आवश्यकता कम: आंतरिक कीट प्रतिरोधी जीन।
- कटाई पश्चात नुकसान कम: फ्लेवर सेवर टमाटर (RNA इंटरफेरेंस द्वारा बीटा-पॉलीगैलेक्टरोनेज़ एंजाइम को रोका गया)।
- खनिज उपयोग क्षमता में वृद्धि: पौधे मिट्टी से अधिक खनिज लेकर पूरी तरह उपयोग करते हैं।
- पोषण गुणवत्ता में वृद्धि: गोल्डन राइस (डेफोडिल पौधे से बीटा-कैरोटीन जीन, विटामिन A का स्रोत)।
पीड़क प्रतिरोधी फसलें: बीटी फसलें और RNA इंटरफेरेंस
बीटी फसलें (जैसे बीटी कपास) बेसिलस थुरिंजेंसिस जीवाणु के क्राय जीन से बनाए गए हैं, जो विशिष्ट कीटों को मारते हैं। RNA इंटरफेरेंस तकनीक का उपयोग सूत्रक (नेमाटोड) जैसे मिलडग्नि इनकॉग्निशिया के विरुद्ध किया गया है।
- बीटी फसलें: बीटी कपास, बीटी मक्का, बीटी धान, बीटी टमाटर, बीटी आलू, बीटी सोयाबीन, बीटी बैंगन।
- क्राय जीन: क्राय 1AC, क्राय 2AB (कपास में), क्राय 1AB (मक्का में)।
- RNA इंटरफेरेंस: डबल स्ट्रैंडेड mRNA बनाकर जीन साइलेंसिंग, तंबाकू के पौधों में सूत्रक नियंत्रण।
- एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेशियन: प्लांट में वांछित जीन डालने के लिए टीआई प्लाज्मिड का उपयोग।
चिकित्सा में जैव प्रौद्योगिकी: लाल जैव प्रौद्योगिकी
चिकित्सा क्षेत्र में पुनरग डीएनए तकनीक से सुरक्षित और प्रभावी औषधियाँ बनाई जाती हैं। जेनेटिकली मॉडिफाइड इंसुलिन (ह्यूमोलिन) का कोई एलर्जिक साइड इफेक्ट नहीं होता, जबकि जानवरों से निकाले गए इंसुलिन से एलर्जी हो सकती है।
- इंसुलिन संरचना: दो पॉलीपेप्टाइड चेन (A: 21 अमीनो एसिड, B: 30 अमीनो एसिड), डाइसल्फाइड बॉन्ड से जुड़ी।
- प्रोइंसुलिन: निष्क्रिय रूप, जिसमें अतिरिक्त C चेन होती है।
- ह्यूमोलिन निर्माण: इकोलाई में A और B चेन के जीन डालकर, डाइसल्फाइड बॉन्ड से संयोजन।
- इंसुलिन ओरली नहीं दी जा सकती: प्रोटीन है, पेट में पच जाती है।
जीन थेरेपी एवं आणविक निदान
जीन थेरेपी में डिफेक्टिव या गायब जीन की जगह हेल्दी जीन डाला जाता है। यह गर्भावस्था के दौरान अधिक प्रभावी है। उदाहरण: ADA (एडिनोसिन डीएमिनेज) की कमी से SCID (सीवियर कंबाइंड इम्यूनो डेफिशिएंसी)।
- उपचार के तरीके:
- बोन मैरो ट्रांसप्लांट
- एंजाइम प्रतिस्थापन (इंजेक्शन द्वारा)
- रेट्रोवायरस द्वारा जीन ट्रांसफर (लसीकाणु में)
- मॉलिक्यूलर डायग्नोसिस: PCR, एलाइजा, ऑटोरेडियोग्राफी, प्रोब्स द्वारा रोग की प्रारंभिक पहचान।
- एलाइजा: एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट ऐसे, एंटीजन-एंटीबॉडी रिएक्शन पर आधारित, HIV जांच में उपयोग।
पारजीनी जंतु (ट्रांसजेनिक एनिमल्स) और उनके उपयोग
पारजीनी जंतु वे हैं जिनके डीएनए में बाहरी जीन डाले गए हैं। 95% से अधिक ट्रांसजेनिक चूहे हैं, जिनका उपयोग जीन फंक्शन, रोग अध्ययन, जैविक उत्पाद निर्माण, टीका और रासायनिक सुरक्षा परीक्षण में होता है।
- मुख्य उपयोग:
- जीन नियंत्रण और शरीर के विकास का अध्ययन
- रोगों (कैंसर, सिस्टिक फाइब्रोसिस, अल्जाइमर) का मॉडलिंग
- जैविक उत्पाद (जैसे अल्फा वन एंटीट्रिप्सिन, अल्फा लैक्ट एल्बुमिन)
- टीका और रासायनिक सुरक्षा परीक्षण (पोलियो टीका, औषधि टॉक्सिसिटी)
नैतिक मुद्दे, पेटेंट और जैव संसाधनों की चोरी (बायोपाइरेसी)
जैव प्रौद्योगिकी में नैतिकता और नियमों की आवश्यकता है ताकि जीवों के साथ छेड़छाड़ का दुरुपयोग न हो। भारत में GEAC (Genetic Engineering Approval Committee) जैव अनुसंधान की वैधानिकता और सुरक्षा की निगरानी करता है।
- पेटेंट समस्या: विकसित देश विकासशील देशों के जैव संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान का उपयोग कर पेटेंट ले लेते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को श्रेय या लाभ नहीं मिलता।
- बायोपाइरेसी उदाहरण: राइस टेक (अमेरिका) ने भारतीय बासमती चावल की किस्मों से नई किस्म बनाकर पेटेंट ले लिया।
- नियमन: भारतीय संसद ने पेटेंट बिल में संशोधन कर ऐसे मामलों पर कार्यवाही के प्रावधान किए हैं।
- बायोपाइरेसी: बिना अनुमति या उचित मुआवजे के जैव संसाधनों का उपयोग कर उत्पाद या तकनीक का पेटेंट लेना।
Additional Notes
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Question 1 of 120
Statement I: Animals that have had their DNA manipulated to possess and express an extra (foreign) gene are transgenic animals.
Statement II: The Indian Parliament has recently cleared the third amendment of the Indian Patents Bill, by including patent terms emergency provisions and research issues into consideration.
Solution
Statement I is correct but Statement II is incorrect.
The applications of biotechnology include:
Solution
All of these
Maximum utilization of the techniques of biotechnology has been made in the field of
Solution
Medicines
PYQs
21 QuestionsClick on an option to find the answer
Question 1 of 21
Which of the following statement is incorrect about Agrobacterium tumifaciens?
(2023-Manipur)
Solution
It is used to deliver gene of interest in both prokaryotic as well as eukaryotic host cells.
Transposons can be used during which one of the following?
(2022)
Solution
Gene silencing
Which one of the following techniques does not serve the purpose of early diagnosis of a disease for its early treatment?
(2023)
Solution
Serum and Urine analysis
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