Science Chapter 1-4 100 - Class 10 Bihar Board Science
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Science Chapter 1-4 100 - Class 10 Bihar Board Science
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विज्ञान कक्षा 10: महत्वपूर्ण प्रश्न एवं अवधारणाएँ
प्रकाश के नियम और दर्पण
प्रकाश के परावर्तन का अर्थ है कि जब प्रकाश की किरण किसी समतल सतह से टकराकर उसी माध्यम में लौट जाती है। परावर्तन के दो मुख्य नियम होते हैं। दर्पणों का चयन उनके उपयोग के अनुसार किया जाता है, जैसे वाहनों के पीछे देखने के लिए उत्तल दर्पण का प्रयोग।
- परावर्तन के नियम:
- आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब एक ही तल में होते हैं।
- आपतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है।
- दर्पणों के उपयोग:…
विज्ञान कक्षा 10: महत्वपूर्ण प्रश्न एवं अवधारणाएँ
प्रकाश के नियम और दर्पण
प्रकाश के परावर्तन का अर्थ है कि जब प्रकाश की किरण किसी समतल सतह से टकराकर उसी माध्यम में लौट जाती है। परावर्तन के दो मुख्य नियम होते हैं। दर्पणों का चयन उनके उपयोग के अनुसार किया जाता है, जैसे वाहनों के पीछे देखने के लिए उत्तल दर्पण का प्रयोग।
- परावर्तन के नियम:
- आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब एक ही तल में होते हैं।
- आपतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है।
- दर्पणों के उपयोग:
- अवतल दर्पण: हेडलाइट, टॉर्च, सर्चलाइट, दाढ़ी बनाने में।
- उत्तल दर्पण: वाहनों के पीछे देखने के लिए, दुकानों में सुरक्षा के लिए।
प्रकाश, लेंस एवं दृष्टि दोष
प्रकाश का वेग विभिन्न माध्यमों में भिन्न होता है। मानव नेत्र में प्रतिबिंब रेटिना पर बनता है। दृष्टि दोषों के कारण और निवारण के उपाय भी महत्वपूर्ण हैं।
- प्रकाश का वेग न्यूनतम: कांच में।
- मानव नेत्र में प्रतिबिंब: रेटिना पर बनता है।
- स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी: 25 सेमी।
- निकट दृष्टि दोष: दूर की वस्तुएं स्पष्ट नहीं दिखतीं; अवतल लेंस से सुधार।
- लेंस की क्षमता और फोकस दूरी: ; यदि क्षमता डायोप्टर है तो फोकस दूरी सेमी।
विद्युत के सिद्धांत एवं मात्रक
विद्युत धारा, विभवांतर, प्रतिरोध आदि के SI मात्रक और संबंधित यंत्रों का ज्ञान आवश्यक है। ओम का नियम और विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव का सूत्र भी पूछा जाता है।
- विद्युत धारा का SI मात्रक: एंपियर।
- विभवांतर मापने का यंत्र: वोल्टमीटर।
- प्रतिरोध का SI मात्रक: ओम।
- चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता का मात्रक: टेस्ला।
- ओम का नियम:
- विद्युत शक्ति के सूत्र: , ,
- ऊष्मीय प्रभाव का सूत्र:
रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं सूत्र
रासायनिक समीकरणों का संतुलन, अभिक्रियाओं के प्रकार, पीएच मान, सामान्य नमक एवं प्लास्टर ऑफ पेरिस के सूत्र, धातु-अधातु की अवस्थाएँ आदि परीक्षा में पूछे जाते हैं।
- संतुलित रासायनिक समीकरण: जिसमें अभिकारक और उत्पाद दोनों ओर परमाणुओं की संख्या समान हो।
- श्वसन: ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया।
- वियोजन अभिक्रिया: जैसे
- उदासीन विलयन का पीएच मान: 7
- साधारण नमक का सूत्र:
- प्लास्टर ऑफ पेरिस का सूत्र:
- कमरे के ताप पर द्रव धातु: पारा (मरकरी)
- कमरे के ताप पर द्रव अधातु: ब्रोमीन
जैविक प्रक्रियाएँ एवं अंग
पौधों और मानव शरीर की संरचना, कार्य, हार्मोन, पोषण के प्रकार, श्वसन के प्रकार, आनुवांशिकी आदि से संबंधित तथ्य परीक्षा में आते हैं।
- जाइलम का कार्य: जल का वहन।
- मानव हृदय के कक्ष: 4 (दो अलिंद, दो निलय)
- स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक: कार्बन डाइऑक्साइड, क्लोरोफिल, सूर्य का प्रकाश (तीनों)
- पाइरुवेट का विखंडन: माइटोकांड्रिया में होता है।
- वृक्क (किडनी): उत्सर्जन तंत्र का भाग।
- दो तंत्रिका कोशिकाओं के मध्य स्थान: सिनेप्स।
- इंसुलिन की कमी से रोग: मधुमेह (डायबिटीज)
- पादप हार्मोन: साइटोकाइनिन (कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है)
- मुकुलन द्वारा अलैंगिक जनन: यीस्ट व हाइड्रा में।
- पराग कोष में: पराग कण पाए जाते हैं।
- आनुवांशिकी का जनक: ग्रेगर जॉन मेंडल।
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
ऊर्जा प्रवाह, जैव निम्नीकरणीय कचरा, ओजोन परत की भूमिका, निषेचन के बाद अंडाशय का परिवर्तन, आहार श्रृंखला व जाल आदि से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
- जैव निम्नीकरणीय कचरा: टिश्यू पेपर।
- ओजोन परत: UV-B विकिरण से सुरक्षा।
- पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा प्रवाह: सदैव एक दिशीय।
- निषेचन के बाद अंडाशय: फल में बदल जाता है।
- आहार श्रृंखला: जीवों की भोजन निर्भरता की एक रेखीय कड़ी।
- आहार जाल: कई श्रृंखलाओं का जाल जैसा संयोजन।
महत्वपूर्ण रासायनिक व जैविक नाम
कुछ रासायनिक व जैविक नामों का पूरा रूप और उनकी विशेषताएँ परीक्षा में सीधे पूछी जाती हैं।
- शुद्ध सोना: 24 कैरेट।
- सिट्रिक अम्ल का स्रोत: संतरा, नींबू।
- ATP का पूरा नाम: एडिनोसिन ट्राई फास्फेट।
- प्लास्टर ऑफ पेरिस के उपयोग: टूटी हड्डियों को जोड़ना, खिलौने व सजावटी मूर्तियाँ बनाना।
अम्ल, क्षार, धमनी व सिरा में अंतर
अम्ल व क्षार, धमनी व सिरा के बीच अंतर को तालिका के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है:
| विशेषता | अम्ल | क्षार |
|---|---|---|
| स्वाद | खट्टा | कड़वा |
| pH मान | 7 से कम | 7 से अधिक |
| आयन | आयन देता है | आयन देता है |
| विशेषता | धमनी | सिरा |
|---|---|---|
| रक्त प्रकार | शुद्ध रक्त | अशुद्ध रक्त |
| दिशा | हृदय से अंगों तक | अंगों से हृदय तक |
| दीवारें | मोटी, लचीली | पतली, वाल्व युक्त |
वायवीय व अवायवीय श्वसन में अंतर
वायवीय श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है, अधिक ऊर्जा बनती है और अंतिम उत्पाद CO₂ व जल होते हैं। अवायवीय श्वसन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में, कोशिका द्रव्य में होता है, उत्पाद इथेनॉल या लैक्टिक अम्ल और ऊर्जा कम बनती है।
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
- स्पेक्ट्रम प्राप्त करने के लिए: प्रिज्म का उपयोग।
- डायनेमो से प्राप्त धारा: दिष्ट और प्रत्यावर्ती दोनों।
- उभयधर्मी ऑक्साइड: जो अम्ल व क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया करे; उदाहरण: एलुमिनियम ऑक्साइड, जिंक ऑक्साइड।
- इंसुलिन हार्मोन: अग्नाशय के लैंगरहेंस की द्वीपिकाओं से निकलता है, रक्त में ग्लूकोज नियंत्रित करता है।
- सूर्योदय व सूर्यास्त के समय सूर्य लाल दिखता है: वायुमंडलीय अपवर्तन व प्रकीर्णन के कारण, लाल रंग की तरंगदैर्ध्य अधिक होने से।
इन सभी बिंदुओं का अभ्यास करें, सभी प्रमुख अवधारणाएँ, सूत्र, अंतर, उदाहरण और उपयोग परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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