Bihar 2027 10th - Class 10 Bihar Board Political Science
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Bihar 2027 10th - Class 10 Bihar Board Political Science
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Bihar Board Class 10 PW
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राजनीति शास्त्र एवं अर्थशास्त्र – मुख्य बिंदु
सत्ता की साझेदारी और लोकतंत्र
सत्ता की साझेदारी सामाजिक समूहों के बीच टकराव की संभावना को कम करती है, राजनीतिक स्थिरता लाती है और सभी समुदायों को शासन में भागीदारी का अवसर देती है। अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा होती है और लोकतंत्र की भावना को मजबूत करती है।
- सत्ता की साझेदारी विभिन्न समुदायों के बीच संघर्ष को कम करती है।
- राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करती है।
- सभी समुदायों को शासन में भागीदारी मिलती है।
- अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा होती है।
संघीय व्यवस्था और शासन के…
राजनीति शास्त्र एवं अर्थशास्त्र – मुख्य बिंदु
सत्ता की साझेदारी और लोकतंत्र
सत्ता की साझेदारी सामाजिक समूहों के बीच टकराव की संभावना को कम करती है, राजनीतिक स्थिरता लाती है और सभी समुदायों को शासन में भागीदारी का अवसर देती है। अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा होती है और लोकतंत्र की भावना को मजबूत करती है।
- सत्ता की साझेदारी विभिन्न समुदायों के बीच संघर्ष को कम करती है।
- राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करती है।
- सभी समुदायों को शासन में भागीदारी मिलती है।
- अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा होती है।
संघीय व्यवस्था और शासन के स्तर
संघीय व्यवस्था में शक्तियों का विभाजन केंद्र और राज्य सरकारों के बीच होता है। भारत में यह विभाजन तीन सूचियों में किया गया है: संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची।
- संघीय व्यवस्था: केंद्र और राज्य दोनों के पास स्वतंत्र अधिकार।
- शक्तियों का विभाजन: संघ सूची (केवल केंद्र), राज्य सूची (केवल राज्य), समवर्ती सूची (दोनों)।
- भारत में संघीय व्यवस्था है, जिसमें संसदीय प्रणाली भी है।
- संघीय राज्य का उदाहरण: अमेरिका, भारत।
- संघीय व्यवस्था की विशेषता: लिखित संविधान, शक्तियों का विभाजन, सर्वोच्च न्यायपालिका, दोहरी शासन व्यवस्था (इकहरी शासन व्यवस्था संघीय राज्य की विशेषता नहीं)।
लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और राजनीति
लोकतंत्र में जनमत पर आधारित शासन होता है। धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है धर्म से रहित शासन, जिसमें सभी धर्मों के प्रति समान भाव होता है। सांप्रदायिक राजनीति धर्म के आधार पर होती है, जो समाज में विभाजन को बढ़ाती है।
- लोकतंत्र: जनमत पर आधारित शासन।
- धर्मनिरपेक्षता: धर्म से रहित, सभी धर्मों के प्रति समान भाव।
- सांप्रदायिक राजनीति: धर्म के आधार पर श्रेष्ठता का भाव।
- प्रत्यक्ष लोकतंत्र: स्विट्जरलैंड।
- अप्रत्यक्ष लोकतंत्र: भारत।
पंचायती राज व्यवस्था
पंचायती राज व्यवस्था भारत में तीन स्तरों पर लागू है: ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद। इसका उद्देश्य स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना है।
- तीन स्तर: ग्राम पंचायत (प्रथम), पंचायत समिति (द्वितीय), जिला परिषद (तृतीय)।
- पंचायती राज का संवैधानिक दर्जा: 73वां संविधान संशोधन (1992)।
- पंचायती राज का कार्यकाल: 5 वर्ष।
- सबसे पहले लागू: राजस्थान के नागौर जिले में, 2 अक्टूबर 1959।
- ग्राम पंचायत का प्रधान: मुखिया।
- ग्राम कचहरी का प्रधान: सरपंच।
- पंचायत की व्यवस्थापिका सभा: ग्राम सभा।
- पंचायती राज में महिलाओं के लिए आरक्षण: भारत में 33%, बिहार में 50%।
नगर निगम एवं स्थानीय स्वशासन
नगर निगम शहरी क्षेत्रों के लिए स्थानीय स्वशासन की संस्था है। पटना नगर निगम बिहार का पहला नगर निगम था। नगर निगम के प्रमुख को महापौर कहा जाता है।
- भारत का पहला नगर निगम: मद्रास (चेन्नई), 1904।
- पटना: बिहार का पहला नगर निगम।
- नगर निगम के आय के स्रोत में आयकर शामिल नहीं है।
- नगर आयुक्त की नियुक्ति राज्य सरकार करती है।
- नगर निगम का प्रमुख: महापौर।
आर्थिक संरचना और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र
अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्र होते हैं: प्राथमिक (कृषि, पशुपालन, मछली पालन), द्वितीयक (उद्योग, गैस, बिजली), तृतीयक (सेवा क्षेत्र)। भारत में सेवा क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक है।
- प्राथमिक क्षेत्र: कृषि, पशुपालन, मछली पालन।
- द्वितीयक क्षेत्र: उद्योग, गैस, बिजली।
- तृतीयक क्षेत्र: सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य।
- हरित क्रांति: प्राथमिक क्षेत्र (कृषि) से संबंधित।
- ऑपरेशन फ्लड: डेयरी विकास से संबंधित।
- बिहार में जीवन यापन का मुख्य साधन: कृषि।
- बिहार का सब्जी उत्पादन में देश में चौथा स्थान।
राष्ट्रीय आय, प्रति व्यक्ति आय और मानव विकास
राष्ट्रीय आय में वस्तुओं एवं सेवाओं का मूल्य जोड़ा जाता है। प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय आय को जनसंख्या से विभाजित कर प्राप्त होती है। मानव विकास सूचकांक में सर्वोच्च स्थान नॉर्वे का है, भारत में केरल राज्य सबसे ऊपर है।
- राष्ट्रीय आय: वस्तुओं एवं सेवाओं का कुल मूल्य।
- प्रति व्यक्ति आय: राष्ट्रीय आय / जनसंख्या।
- मानव विकास सूचकांक: जीवन प्रत्याशा, शिक्षा, जीवन स्तर।
- भारत की पहली मानव विकास रिपोर्ट: 2002, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल में।
- मानव विकास सूचकांक का जनक: डॉ. महबूब उल हक (पाकिस्तान)।
- भारत में सबसे अधिक प्रति व्यक्ति आय: गोवा।
- सबसे कम प्रति व्यक्ति आय: बिहार, बिहार में शिवहर जिले में सबसे कम।
योजना आयोग, नीति आयोग और पंचवर्षीय योजनाएं
योजना आयोग की स्थापना 15 मार्च 1950 को हुई थी, प्रथम अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। नीति आयोग की स्थापना 1 जनवरी 2015 को हुई, प्रथम अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। पंचवर्षीय योजनाओं में कृषि का विकास पहली योजना का मुख्य उद्देश्य था।
- योजना आयोग: 15 मार्च 1950, प्रथम अध्यक्ष पंडित नेहरू।
- नीति आयोग: 1 जनवरी 2015, प्रथम अध्यक्ष नरेंद्र मोदी।
- पंचवर्षीय योजनाएं: पहली योजना – कृषि विकास, चौथी योजना – बोनस अधिनियम।
- योजना आयोग ने गरीबी रेखा के लिए कैलोरी मापदंड दिया: ग्रामीण – 2400 कैलोरी, शहरी – 2100 कैलोरी।
आर्थिक विकास, गरीबी और सामाजिक संरचना
आर्थिक विकास की माप के लिए सबसे उपयुक्त सूचकांक प्रति व्यक्ति आय है। गरीबी रेखा का निर्धारण योजना आयोग द्वारा किया गया। गरीबी को कैंसर रोग की तरह अर्थशास्त्री कुजनेट्स ने कहा। गरीबी गरीबी को जन्म देती है – रेगनर नर्व्स का कथन है।
- आर्थिक विकास का सूचकांक: प्रति व्यक्ति आय।
- गरीबी रेखा: योजना आयोग द्वारा कैलोरी मापदंड।
- गरीबी को कैंसर रोग: कुजनेट्स।
- गरीबी गरीबी को जन्म देती है: रेगनर नर्व्स।
- सामाजिक संरचना के अंग: शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, आवास।
मिश्रित, समाजवादी और पूंजीवादी अर्थव्यवस्था
मिश्रित अर्थव्यवस्था में समाजवादी और पूंजीवादी दोनों तत्व होते हैं। भारत में मिश्रित अर्थव्यवस्था है। समाजवादी अर्थव्यवस्था में सरकार का स्वामित्व, पूंजीवादी में निजी स्वामित्व होता है।
- मिश्रित अर्थव्यवस्था: भारत।
- समाजवादी अर्थव्यवस्था: रूस, चीन, क्यूबा।
- पूंजीवादी अर्थव्यवस्था: अमेरिका।
- समाजवादी अर्थव्यवस्था का गुण: सामाजिक कल्याण।
- पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों पर निजी स्वामित्व।
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य एवं प्रश्न
- धर्म को राजनीति से अलग नहीं किया जा सकता – महात्मा गांधी का कथन।
- अर्थशास्त्र पुस्तक: कौटिल्य द्वारा लिखित।
- शेयर बाजार की नियामक संस्था: सेबी (सेल्स एंड इन्वेस्टमेंट बैंक ऑफ इंडिया)।
- बिहार के पिछड़ेपन के कारण: जनसंख्या वृद्धि, कृषि पर दबाव, बाढ़ एवं सूखा।
- सतत विकास: अपने और आने वाली पीढ़ियों का विकास।
- फूट डालो और राज करो की नीति: अंग्रेजों द्वारा।
- गठबंधन सरकार की संभावना: बहुदलीय व्यवस्था में।
- आर्थिक क्रियाओं का मुख्य उद्देश्य: जीविकोपार्जन (आय कमाना)।
- समाज की सभी आर्थिक क्रियाओं का योग: अर्थव्यवस्था (इकोनॉमी)।
- बिहार के विकास के बिना भारत का विकास संभव नहीं – डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का कथन।
- आर्थिक क्रियाओं में प्राथमिक क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे प्रमुख।
- वैश्वीकरण से सबसे कम लाभ कृषि को, सबसे अधिक सेवा क्षेत्र को।
- केंद्रीय सांख्यिकी संगठन की स्थापना: 1951।
- राष्ट्रीय मानव विकास रिपोर्ट: योजना आयोग द्वारा जारी।
- आर्थिक विकास का गैर-आर्थिक कारक: सामाजिक संस्थाएं।
- जीवन की भौतिक गुणवत्ता के सूचक: जीवन प्रत्याशा, शिशु मृत्यु दर, मौलिक साक्षरता (तीनों)।
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