Disaster Management - Class 10 Bihar Board Geography
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Disaster Management - Class 10 Bihar Board Geography
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Bihar Board Class 10 PW
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आपदा प्रबंधन
आपदा और आपदा प्रबंधन की परिभाषा
आपदा का सामान्य अर्थ संकट है, लेकिन हर संकट आपदा नहीं होता। आपदा वह संकट है जिससे पूरा समाज, गांव, कस्बा या शहर प्रभावित हो जाए। आपदा प्रबंधन का अर्थ है आपदा के प्रभाव को कम करना, यानी मैनेजमेंट के माध्यम से आपदा से होने वाली हानि को न्यूनतम करना।
- आपदा: ऐसा संकट जिससे समाज का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो।
- प्रबंधन: आपदा के प्रभाव को कम करने की प्रक्रिया।
आपदा के प्रकार
आपदाएं दो प्रकार की होती हैं: प्राकृतिक और मानवीय। प्राकृतिक आपदाओं के लिए प्रकृति जिम्मेदार…
आपदा प्रबंधन
आपदा और आपदा प्रबंधन की परिभाषा
आपदा का सामान्य अर्थ संकट है, लेकिन हर संकट आपदा नहीं होता। आपदा वह संकट है जिससे पूरा समाज, गांव, कस्बा या शहर प्रभावित हो जाए। आपदा प्रबंधन का अर्थ है आपदा के प्रभाव को कम करना, यानी मैनेजमेंट के माध्यम से आपदा से होने वाली हानि को न्यूनतम करना।
- आपदा: ऐसा संकट जिससे समाज का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो।
- प्रबंधन: आपदा के प्रभाव को कम करने की प्रक्रिया।
आपदा के प्रकार
आपदाएं दो प्रकार की होती हैं: प्राकृतिक और मानवीय। प्राकृतिक आपदाओं के लिए प्रकृति जिम्मेदार होती है, जबकि मानवीय आपदाओं के लिए मानव।
- प्राकृतिक आपदाएं: बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूकंप, भूस्खलन, ज्वालामुखी, सुनामी।
- मानवीय आपदाएं: आतंकवाद, सांप्रदायिक दंगे, रासायनिक हथियार, कोविड जैसी महामारियां।
प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव
प्राकृतिक आपदाएं मानव जीवन, पर्यावरण और समाज पर गहरा प्रभाव डालती हैं। इनमें जनहानि, विस्थापन, मानसिक तनाव, संपत्ति की हानि, कृषि व उद्योग का नाश, पर्यावरणीय असंतुलन आदि शामिल हैं।
- मानव जीवन पर: मृत्यु, घायल, बीमार, विस्थापन, मानसिक तनाव।
- संपत्ति पर: घर, सड़क, पुल, बिजली, संचार का नाश।
- पर्यावरण पर: भूमि कटाव, जंगलों का नाश, जैव विविधता को नुकसान।
- समाज पर: गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा।
भारत में आपदा प्रबंधन की संरचना
भारत में आपदा प्रबंधन पांच स्तरों पर होता है: गांव, प्रखंड (ब्लॉक), जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर। प्रत्येक स्तर पर अलग-अलग संस्थाएं और विभाग कार्यरत हैं।
- राष्ट्रीय स्तर: गृह मंत्रालय (नोडल मंत्रालय), NDRF (नेशनल डिजास्टर रेस्पॉन्स फोर्स)।
- राज्य स्तर: राज्य आपदा प्रबंधन विभाग/प्राधिकरण।
- जिला स्तर: जिला मजिस्ट्रेट (DM) कार्यालय।
- प्रखंड स्तर: प्रखंड कार्यालय, पंचायत समिति।
- गांव स्तर: ग्रामीण आपदा प्रबंधन समिति।
भारत में प्रमुख विनाशकारी आपदाएं
भारत में कई विनाशकारी आपदाएं आई हैं, जिनमें 1934 का बिहार भूकंप, 1999 का उड़ीसा चक्रवात, 2008 की बिहार बाढ़, 2004 की सुनामी प्रमुख हैं।
- बिहार का शोक: कोसी नदी (बार-बार बाढ़ लाने के कारण)।
- बंगाल का शोक: दामोदर नदी।
- 2004 की सुनामी: इंदिरा पॉइंट डूब गया।
- सूखा वर्ष: 1966 (भारत में वर्षा नहीं हुई)।
बाढ़: कारण, क्षेत्र और नियंत्रण
बाढ़ तब आती है जब नदी का जल अपने तट से बाहर आकर आसपास के क्षेत्र को जलमग्न कर देता है। इसके प्राकृतिक कारणों में अत्यधिक वर्षा, बादल फटना, हिमालय से बर्फ पिघलना, नदियों में गाद का जमाव, समुद्री तूफान आदि हैं। मानवीय कारणों में बाढ़ क्षेत्र में घर बनाना, वनों की कटाई, नालियों का अवरोध, बांधों का रखरखाव न करना आदि शामिल हैं।
- प्रमुख बाढ़ प्रभावित क्षेत्र: बिहार (कोसी, गंडक, बागमती), उत्तर प्रदेश (गंगा, घाघरा, शारदा), पंजाब-हरियाणा (सतलज, घग्गर), पश्चिम बंगाल (दामोदर), उड़ीसा (महानदी), असम (ब्रह्मपुत्र), आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु।
- बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं: भाखड़ा नांगल (सतलज), नागार्जुन सागर (कृष्णा), हीराकुंड (महानदी), दामोदर घाटी (दामोदर), तिलैया (बराकर)।
- 2008 बिहार बाढ़: कुशहा तटबंध टूटने से आई, कोसी नदी के मार्ग परिवर्तन के कारण।
सूखा: कारण, क्षेत्र और प्रभाव
सूखा धीरे-धीरे होने वाली आपदा है, जिसमें वर्षा की कमी के कारण भूमि, फसल, जल संसाधन सूख जाते हैं। प्राकृतिक कारणों में कम वर्षा, मानसून में विलंब, अधिक तापमान, लू आदि हैं। मानवीय कारणों में वनों की कटाई, भूजल का अत्यधिक दोहन, अधिक सिंचाई वाली फसलें, चारागाह का नष्ट होना शामिल हैं।
- प्रमुख सूखा क्षेत्र: पश्चिमी भारत (राजस्थान, गुजरात, सौराष्ट्र), दक्षिण भारत (कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु), मध्य भारत (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र-विदर्भ), उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश-बुंदेलखंड)।
- प्रभाव: कृषि में कमी, फसल नष्ट, पेयजल व पशुधन की कमी, बेरोजगारी, पलायन, गरीबी, भूमि का मरुस्थलीकरण।
भूकंप: कारण, क्षेत्र, तरंगें और बचाव
भूकंप पृथ्वी की प्लेटों के टकराने, ज्वालामुखी विस्फोट, खदानों में विस्फोट आदि से आता है। भूकंप का केंद्र (हाइपोसेंटर/अनुकेंद्र) वह स्थान है जहां से भूकंप उत्पन्न होता है, और सतह पर सबसे पहले अनुभव होने वाला स्थान अधिकेंद्र (एपीसेंटर) कहलाता है।
- भूकंपीय तरंगें: पी (प्राथमिक, सबसे तेज, कम विनाशकारी), एस (द्वितीयक, ठोस माध्यम में, अधिक विनाशकारी), एल (सतही, सबसे धीमी, सबसे अधिक विनाशकारी)।
- भारत के भूकंप जोन: कुल 5 जोन, जोन 5 सबसे खतरनाक (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, पूर्वोत्तर, अंडमान निकोबार), जोन 4 (दिल्ली, बिहार, गुजरात)।
- मापन: सिस्मोग्राफ यंत्र, रिएक्टर स्केल।
- बचाव: पूर्वानुमान, भूकंप रोधी भवन (आयताकार, मजबूत नींव, हल्का भार), जन जागरूकता, राहत शिविर, आपातकालीन सेवाएं।
सुनामी: कारण, प्रभाव और बचाव
सुनामी जापानी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ समुद्र की लहरों का अचानक ऊपर उठना है। समुद्र तल के नीचे शक्तिशाली भूकंप या विस्फोट से सुनामी आती है।
- प्रभाव: तटीय गांव, कस्बे, बंदरगाह, सड़क, रेल, हवाई अड्डा, होटल आदि नष्ट हो जाते हैं; जनहानि, महामारी, विस्थापन।
- बचाव: समुद्र तल पर उपकरणों से निगरानी, सुनामी वार्निंग सेंटर, तटीय योजना (ऊंचे स्थान पर घर), मॉक ड्रिल, मैंग्रोव वन का निर्माण।
आकस्मिक एवं दीर्घकालीन प्रबंधन
आकस्मिक प्रबंधन वह है जो तुरंत बचाव के लिए किया जाए, जैसे राहत शिविर, भोजन-पानी की व्यवस्था, मलबे से बचाव, इंफ्रारेड कैमरा से खोज। दीर्घकालीन प्रबंधन में बांध, तटबंध, पुनर्वास, वैज्ञानिक निरीक्षण आदि आते हैं।
- बाढ़ में: ऊंचे स्थान पर जाना, भोजन-पानी, पशुचारा।
- भूकंप/सुनामी में: राहत शिविर, मलबे से बचाव, इंफ्रारेड कैमरा।
- आग में: ठंडा पानी, फंसे लोगों को निकालना, अग्निशमक दल, बिजली बंद करना।
- राहतकर्मी उपकरण: हेलमेट, गम बूट, लाइफ जैकेट, सीटी, टॉर्च, रस्सी।
आपदा काल में वैकल्पिक संचार व्यवस्था
आपदा के समय संचार व्यवस्था बाधित हो सकती है (केबल टूटना, बिजली कटना, टावर खराब होना)। वैकल्पिक संचार साधनों में एंटीना, रेडियो तरंग, वाकी-टॉकी, हेम रेडियो, उपग्रह संचार शामिल हैं।
- हेम रेडियो: गैर व्यवसायिक, सरकारी संस्थाओं द्वारा, कम ऊर्जा में।
- उपग्रह संचार: स्पष्ट आवाज, दूरस्थ क्षेत्र में संपर्क।
- सबसे लोकप्रिय साधन: मोबाइल।
सह अस्तित्व और संरचनात्मक उपाय
आपदा के साथ सह अस्तित्व का अर्थ है साथ मिलकर हानि को कम करना। भूकंप रोधी भवन आयताकार, मजबूत नींव, हल्का भार, दीवारों में सहारा, भवनों में दूरी के साथ बनाए जाएं। भूस्खलन से बचाव के लिए ढाल पर निर्माण न करें, वृक्षारोपण करें, जल निकासी, रोकथाम दीवार बनाएं। सुनामी से बचाव के लिए तट से दूर ऊंचे स्थान पर घर, मैंग्रोव वन, तटबंध बनाएं। बाढ़ नियंत्रण के लिए तटबंध, भूमि उपयोग नियंत्रण, जलाशय, रिंग बांध बनाएं।
- प्राकृतिक आपदा नहीं: आग लगना।
- भूकंप संभावित क्षेत्र में भवन: आयताकार।
- भूस्खलन क्षेत्र में ढलान पर निर्माण: अनुचित।
- तटीय क्षेत्र में निर्माण: समुद्र तट से दूर ऊंचाई पर।
- बाढ़ से सबसे अधिक हानि: भवन, पशु, फसल सभी को।
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