CUET 2026 History Chapter 1, in One Shot CUET - CUET History
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CUET 2026 History Chapter 1, in One Shot CUET - CUET History
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CUET Hindi Medium by PW
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हड़प्पा सभ्यता: ईंट, मनके तथा अस्थियां
हड़प्पा सभ्यता का काल निर्धारण
हड़प्पा सभ्यता का कालक्रम तीन प्रमुख कालों में विभाजित किया गया है: पूर्ववर्ती काल, विकसित काल, और परवर्ती काल। यह सभ्यता 6000 ईसा पूर्व से 1400 ईसा पूर्व के बीच फैली रही, जिसमें ग्रामीण से शहरी सभ्यता का विकास और अंत शामिल है।
- पूर्ववर्ती काल (6000 ईसा पूर्व – 2600 ईसा पूर्व): ग्रामीण सभ्यता, स्थायी जीवन, कृषि व पशुपालन, प्रमुख स्थल – कालीबंगा।
- विकसित काल (2600 ईसा पूर्व – 1900 ईसा पूर्व): शहरीकरण, नगर नियोजन, राजनीतिक व आर्थिक विकास, प्रमुख स्थल – मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, लोथल।…
हड़प्पा सभ्यता: ईंट, मनके तथा अस्थियां
हड़प्पा सभ्यता का काल निर्धारण
हड़प्पा सभ्यता का कालक्रम तीन प्रमुख कालों में विभाजित किया गया है: पूर्ववर्ती काल, विकसित काल, और परवर्ती काल। यह सभ्यता 6000 ईसा पूर्व से 1400 ईसा पूर्व के बीच फैली रही, जिसमें ग्रामीण से शहरी सभ्यता का विकास और अंत शामिल है।
- पूर्ववर्ती काल (6000 ईसा पूर्व – 2600 ईसा पूर्व): ग्रामीण सभ्यता, स्थायी जीवन, कृषि व पशुपालन, प्रमुख स्थल – कालीबंगा।
- विकसित काल (2600 ईसा पूर्व – 1900 ईसा पूर्व): शहरीकरण, नगर नियोजन, राजनीतिक व आर्थिक विकास, प्रमुख स्थल – मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, लोथल।
- परवर्ती काल (1900 ईसा पूर्व – 1400 ईसा पूर्व): पतन की ओर, सभ्यता का अंत।
हड़प्पा सभ्यता की खोज और प्रमुख स्थल
हड़प्पा सभ्यता की खोज 1921 में हुई, जिसमें कई पुरातात्विक स्थलों की खुदाई हुई। खोज की प्रक्रिया में रेलवे निर्माण के दौरान कई स्थल नष्ट भी हुए।
- 1853-56: रेलवे लाइन बिछाते समय हड़प्पा स्थल की ईंटों का उपयोग।
- ब्रंटन बंधु: ईंटें व मोहरे खोजकर एलेक्जेंडर कनिंघम को दीं।
- 1861: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की स्थापना, प्रथम महानिदेशक – एलेक्जेंडर कनिंघम।
- 1921: हड़प्पा की खुदाई – दयाराम साहनी (निर्देशन: जॉन मार्शल)।
- 1922: मोहनजोदड़ो की खोज – आर डी बनर्जी।
- अन्य स्थल: लोथल (एसआर राव), कालीबंगा (बीबी लाल, बी के थापर), धोलावीरा (आर एस बिष्ट)।
नगर नियोजन की विशेषताएं
हड़प्पा सभ्यता का नगर नियोजन अत्यंत विकसित था, जिसमें नगरों का निर्माण योजनाबद्ध तरीके से किया गया। नगरों को दो भागों में विभाजित किया जाता था – दुर्ग (ऊंचाई पर, अमीर वर्ग) और निचला शहर (आम जनता)।
- नगर नियोजन के तत्व:
- नगर नदी के किनारे बसाए जाते थे।
- अमीर वर्ग (पुरोहित) ऊंचाई पर, आम वर्ग निचले हिस्से में।
- दुर्ग क्षेत्र छोटा, निचला शहर बड़ा।
- दुर्ग की चारदीवारी (किला)।
- सड़कें व जल निकासी:
- सड़कें व गलियां समकोण (90°) पर काटती थीं – ग्रिड पद्धति।
- मुख्य सड़क (राजपथ), सेकेंडरी सड़कें, गलियां।
- जल निकासी के लिए ढकी हुई ईंट की नालियां, घरों से गंदा पानी गलियों की नालियों में, फिर मुख्य नाले से नदी में।
- घर की संरचना:
- घरों के दरवाजे के पीछे दीवार, आंगन, कुआं, स्नानागार, रसोईघर, कमरे।
- मोहनजोदड़ो में 700 कुएं, दो मंजिला घरों के प्रमाण (सीढ़ियां)।
जीवन निर्वाह के तरीके
हड़प्पा वासी कृषि, पशुपालन, शिल्प उत्पादन आदि से जीवन निर्वाह करते थे। कृषि तकनीक व सिंचाई के प्रमाण भी मिले हैं।
- मुख्य फसलें: गेहूं, जौ, दाल, चना, तिल, गुजरात में बाजरा।
- कृषि तकनीक: कालीबंगा से जुताई के प्रमाण, हल के प्रमाण – बनावली व चोलीस्तान।
- सिंचाई: सुरतोगाही (अफगानिस्तान) से नहरों के प्रमाण, धोलावीरा से जलाशय व बांध।
- पशुपालन: भेड़, बकरी, भैंस, सूअर।
- साक्ष्य: मोहरे, ईंटें, मनके, पशु आकृतियां।
सामाजिक भिन्नताएं व समाधान
हड़प्पा सभ्यता में सामाजिक भिन्नताओं का पता समाधानों (कब्रों) व विलासिता की वस्तुओं से चलता है। अमीर-गरीब का अंतर समाधानों में मिले अवशेषों से ज्ञात होता है।
- समाधान: मृतकों को गर्तों में दफनाया जाता था।
- अमीर की कब्र: तांबे का बर्तन, तांबे का कांच।
- गरीब की कब्र: मिट्टी के बर्तन।
- विलासिता की वस्तुएं: फायेंस (कृत्रिम मिश्रण से बनी कीमती वस्तुएं), चकियां, सुइयां।
- लिपि न पढ़ पाने के कारण सामाजिक अंतर का अध्ययन मुख्यतः समाधानों व वस्तुओं से।
शिल्प उत्पादन व उद्योग
हड़प्पा सभ्यता में शिल्प उत्पादन कुटीर उद्योग के रूप में विकसित था। मनके, शंख, मोहर, धातुएं, आभूषण आदि का निर्माण होता था।
- प्रमुख केंद्र: चनहुदड़ो – मनके, शंख कुटाई, मोहर निर्माण।
- मनके निर्माण: कारनेलियन, जेस्पर, स्फेटिक, क्वार्ट्ज, सेलखेड़ी (मुलायम पत्थर)।
- शंख उद्योग: नागेश्वर (गुजरात), बालाकोट (पाकिस्तान) – समुद्र तट के समीप।
- मनके छेदने के उपकरण: चनहुदड़ो, लोथल, धोलावीरा।
- सोना: कोलार से, तांबा – खेतड़ी से, टिन – अफगानिस्तान/ईरान से, चांदी – अफगानिस्तान/ईरान से, शंख – नागेश्वर/बालाकोट से, नील रत्न (लाजवर्ध) – सुरतोगाही से।
लिपि, बाट और व्यापार
हड़प्पा लिपि अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है। यह दाएं से बाएं लिखी जाती थी, चित्रात्मक (भावित्रात्मक) थी। व्यापार वस्तु विनिमय प्रणाली पर आधारित था, जिसमें बाटों का प्रयोग होता था।
- लिपि: दाएं से बाएं, 64 मूल चिन्ह, कुल 375-400 चिन्ह, सबसे लंबा अभिलेख – 26 चिन्ह।
- बाट: व्यापार में उपयोग, दो मानक – ऊपरी (दशमलव प्रणाली), निचला (द्विधारी प्रणाली – 1, 2, 4, 8, 16)।
- व्यापार: वस्तु विनिमय प्रणाली, मोहरों का उपयोग पहचान के लिए।
- मेसोपोटामिया में हड़प्पा को मेलुआ (नाविकों का देश, हाजा पक्षी का देश) कहा गया।
हड़प्पा सभ्यता का पतन
हड़प्पा सभ्यता के पतन के कई कारण माने जाते हैं, जिनमें बाढ़, आर्यों का आक्रमण, जलवायु परिवर्तन, नदियों का मार्ग बदलना, महामारी, भूकंप आदि शामिल हैं।
- बाढ़ का कारण: जॉन मार्शल के अनुसार बार-बार बाढ़ से मोहनजोदड़ो में सात स्तर के टीले बने।
- आर्यों का आक्रमण: आर एम व्हीलर का मत, जिसे डेल्स ने नकारा।
- अन्य कारण: जलवायु परिवर्तन, सूखा, नदियों का मार्ग बदलना, वनों की कटाई, महामारी, भूकंप।
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य व MCQ बिंदु
- विशाल स्नानागार: मोहनजोदड़ो के दुर्ग में, ईंटों को जोड़ने के लिए जिप्सम, प्लास्टर के लिए चारकोल, जलकुंड की लंबाई 30 फीट, चौड़ाई 23 फीट, गहराई 8 फीट।
- ईंटों का अनुपात: लंबाई:चौड़ाई:ऊंचाई = 4:2:1।
- अवतल चक्की: अनाज पीसने व मसाले कूटने के लिए।
- केंद्रीय सत्ता के प्रमाण: मोहरे, लिपि का मानकीकरण, नियोजित नगर, एकरूपता।
- टीला: बार-बार उजड़ने-बसने से बनी ऊंची जगह।
- अग्नि वेदिका: कालीबंगा व लोथल – अनुष्ठानिक कार्य/यज्ञ के प्रमाण।
- पुरोहित राजा की मूर्ति: मोहनजोदड़ो से प्राप्त।
- फायेंस: रेत, बालू, रंग, चिपचिपे पदार्थ से बनी कृत्रिम कीमती वस्तुएं।
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रथम महानिदेशक: एलेक्जेंडर कनिंघम।
- कांसा निर्माण: तांबा + टिन।
- नहरों के साक्ष्य: सुरतोगाही (अफगानिस्तान)।
- शिल्पकारों की प्रक्रिया: मनके निर्माण में घिसाई, पॉलिश, छेद।
- समाधान में बहुमूल्य वस्तुएं नहीं दफनाई जाती थीं (मिस्र के विपरीत)।
- शंख की वस्तुएं: लेपिस लजुली (नील रत्न) कच्चा माल नहीं था।
- घर में सीढ़ियां: दो मंजिला घर, छत का दैनिक उपयोग, छत पर सोना।
परीक्षा के लिए विशेष ध्यान देने योग्य बिंदु
- हड़प्पा सभ्यता के कालक्रम, नगर नियोजन, सामाजिक भिन्नता, शिल्प उत्पादन, लिपि, बाट, पतन के कारणों पर आधारित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
- MCQ में अक्सर स्थल-विशेष, खोजकर्ता, निर्माण सामग्री, अनुपात, प्रमुख वस्तुएं, व्यापारिक संबंध, पतन के कारण, समाधानों के अवशेष, शिल्प उत्पादन के केंद्र, लिपि के तथ्य, बाट की प्रणाली, और प्रमुख खोजों से जुड़े तथ्य पूछे जाते हैं।
- एनसीईआरटी की लाइनें व तथ्य विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, बाहर की जानकारी की आवश्यकता नहीं।
Quiz
40 QuestionsClick on an option to find the answer
Question 1 of 40
हड़प्पा साइट को उसकी खास आर्कियोलॉजिकल खोज से मिलाएं:
साइट फाइंडिंग (a) धोलावीरा (i) जुते हुए खेत के सबूत (b) शोर्तुघई (ii) पानी के तालाब (c) कालीबंगन (iii) नहरों के निशान (d) बनावली (iv) हल के टेराकोटा मॉडल
Solution
(a)-ii, (b)-iii, (c)-i, (d)-iv
विजयनगर शहर का दूसरा नाम विकल्प था।
Solution
हम्पी
परिपक्व हड़प्पा संस्कृति में प्रारंभिक हड़प्पा संस्कृतियों के साथ सामान्य तत्व थे, जिसमें निर्वाह रणनीतियाँ भी शामिल थीं, जिसका अर्थ है कि दोनों संस्कृतियों के लोगों में समानता थी?
Solution
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