CUET 2026 Hindi Complete Marathon CUET Hindi - CUET Hindi
Watch Video
Study smarter with Pi Lens
Get Notes, PYQs, Quiz and more for any Youtube video!

CUET 2026 Hindi Complete Marathon CUET Hindi - CUET Hindi
36 views
CUET Hindi Medium by PW
Notes
Video Summary
हिंदी भाषा एवं साहित्य: परीक्षा-संभावित बिंदु
समास, संधि और शब्द-रचना
समास, संधि और शब्द-रचना हिंदी व्याकरण के महत्वपूर्ण भाग हैं। समास में दो या दो से अधिक शब्द मिलकर एक नया अर्थ देते हैं, संधि में दो वर्णों के मेल से परिवर्तन होता है, और शब्द-रचना में शब्दों की उत्पत्ति और भेद देखे जाते हैं।
- कर्मधारय समास: विशेषण + विशेष्य (जैसे: नीलकमल = नीला कमल)
- द्वंद्व समास: दोनों पद प्रधान (जैसे: माता-पिता, भाई-बहन)
- अव्ययीभाव समास: प्रथम पद प्रधान, अव्यय या उपसर्ग (जैसे: भरपेट, प्रतिदिन, पल-पल)
- तत्सम शब्द: उच्चारण में कठिन, जैसे अटालिका; तद्भव: बोलने…
हिंदी भाषा एवं साहित्य: परीक्षा-संभावित बिंदु
समास, संधि और शब्द-रचना
समास, संधि और शब्द-रचना हिंदी व्याकरण के महत्वपूर्ण भाग हैं। समास में दो या दो से अधिक शब्द मिलकर एक नया अर्थ देते हैं, संधि में दो वर्णों के मेल से परिवर्तन होता है, और शब्द-रचना में शब्दों की उत्पत्ति और भेद देखे जाते हैं।
- कर्मधारय समास: विशेषण + विशेष्य (जैसे: नीलकमल = नीला कमल)
- द्वंद्व समास: दोनों पद प्रधान (जैसे: माता-पिता, भाई-बहन)
- अव्ययीभाव समास: प्रथम पद प्रधान, अव्यय या उपसर्ग (जैसे: भरपेट, प्रतिदिन, पल-पल)
- तत्सम शब्द: उच्चारण में कठिन, जैसे अटालिका; तद्भव: बोलने में सरल, जैसे अटारी
- शब्द-शक्ति: अभिधा (सीधा अर्थ), लक्षणा (अन्य अर्थ), व्यंजना (अलग-अलग अर्थ)
- शब्द के भेद: अर्थ के आधार पर – सार्थक, निरर्थक; रचना के आधार पर – रूढ़, यौगिक, योगरूढ़; उत्पत्ति के आधार पर – तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज (व्याकरण के अनुसार संकर भी)
अलंकार, रस और काव्यांग
हिंदी काव्य में अलंकार, रस और उनके अंगों की विशेष भूमिका है। अलंकार काव्य की शोभा बढ़ाते हैं, रस भावनाओं की अभिव्यक्ति करते हैं।
- उपमा अलंकार: सा, सी, से, सम, सरिस, जैसा आदि वाचक शब्दों से तुलना (जैसे: चांद सा मुखड़ा)
- रूपक अलंकार: उपमेय-उपमान के बीच योजक चिन्ह नहीं
- अनुप्रास: वर्णों की आवृत्ति; यमक: शब्द की पुनरावृत्ति
- श्लेष अलंकार: एक शब्द के अनेक अर्थ (जैसे: सुब्रन को खोजत फिरत कवि कामी और चोर)
- उत्प्रेक्षा अलंकार: मनो, मानो, जानो आदि से कल्पना या संभावना
- अतिशयोक्ति: अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर कहना
- रस: भरत मुनि के अनुसार 8 (शांत रस को नहीं माना), आधुनिक काल में 11 (भक्ति, वात्सल्य जोड़े गए)
- वीर रस: स्थायी भाव – उत्साह; करुण: शोक; हास्य: हास; श्रृंगार: रति
- रस के अंग: विभाव, अनुभाव, संचारी (व्यभिचारी) भाव, स्थायी भाव (कुल 4)
- संचारी भाव: 33, बुलबुले की तरह
वाक्य, वाच्य, काल और कारक
वाक्य, वाच्य, काल और कारक हिंदी व्याकरण के आधार हैं। वाक्य के भेद, वाच्य के प्रकार, काल के भेद और कारकों का सही प्रयोग परीक्षा में पूछे जाते हैं।
- वाक्य के भेद: अर्थ के आधार पर – 8; रचना के आधार पर – 3 (सरल, संयुक्त, मिश्र)
- वाक्य के अंग: उद्देश्य (subject), विधेय (predicate)
- वाच्य: कृत (कर्ता प्रधान), कर्म (कर्म प्रधान, द्वारा/से), भाव (भाव प्रधान, विवशता/अनुरोध)
- काल: पूर्ण भूतकाल (था, थी, थे), अपूर्ण भूतकाल (रहा था, रही थी), संदिग्ध भूतकाल (आ होगा, इ होगा), सामान्य भूतकाल (आ, ई, ए)
- कारक: हिंदी में 8, सर्वनाम में 7 (संबोधन नहीं)
- संप्रदान कारक: देने के अर्थ में 'को' (जैसे: सीता ने राम को फल दिया)
- अधिकरण कारक: 'पर', 'में' (जैसे: मेज पर पुस्तक रखी है)
- अपादान कारक: 'से' – अलगाव, तुलना, ईर्ष्या, प्रेम
पर्यायवाची, विलोम, मुहावरे और लोकोक्तियाँ
पर्यायवाची, विलोम, मुहावरे और लोकोक्तियाँ भाषा की विविधता और अभिव्यक्ति को समृद्ध करते हैं। परीक्षा में इनसे जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
- उदार का विलोम: कृपण; उन्नति का विलोम: अवनति; अगम का विलोम: सुगम
- बादल का पर्यायवाची: जलद, नीरद, मेघ (वारिज – कमल का पर्याय)
- भवरे का पर्यायवाची: चंचरीक, शिलीमुख, मिलिंद (प्रभाकर – सूर्य का पर्याय)
- आंख की किरकिरी होना: अप्रिय लगना
- अध जल गगरी छलकत जाए: कम ज्ञान होने पर भी दिखावा करना
- नीम हकीम खतरे जान: अल्पज्ञान हानिकारक होता है
साहित्यिक काल, प्रमुख रचनाएँ एवं लेखक
हिंदी साहित्य के काल, प्रमुख रचनाएँ और उनके रचनाकार परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कालों का सही अनुक्रम, रचनाओं के नाम और लेखक याद रखना आवश्यक है।
- हिंदी साहित्य के काल: आदिकाल (वीरगाथा काल), भक्ति काल (स्वर्ण युग), रीतिकाल (अलंकरण काल), आधुनिक काल (खड़ी बोली का विकास)
- महत्वपूर्ण रचनाएँ:
- कामायनी – जयशंकर प्रसाद (15 सर्ग)
- राम की शक्ति पूजा, सरोज स्मृति – निराला (सरोज स्मृति – शोक गीत)
- पल्लव – सुमित्रानंदन पंत
- मैला आंचल – फणीश्वरनाथ रेणु (प्रथम आंचलिक उपन्यास)
- अंधा युग – धर्मवीर भारती (गीत नाट्य)
- कलम का सिपाही – अमृत राय (प्रेमचंद की जीवनी)
- पृथ्वीराज रासो – चंद्रबरदाई (आदिकाल, वीरगाथा काल)
- ज्ञानपीठ पुरस्कार: हिंदी में पहला – पंत (चिदंबरा), महादेवी वर्मा (यामा), दिनकर (उर्वशी)
- महादेवी वर्मा: आधुनिक मीरा, गिल्लू रेखाचित्र
पत्र लेखन, विराम चिन्ह एवं व्याकरणिक नियम
पत्र लेखन, विराम चिन्ह और व्याकरणिक नियमों का सही प्रयोग भाषा की शुद्धता के लिए आवश्यक है। परीक्षा में पत्र के प्रकार, विराम चिन्हों का प्रयोग और वर्तनी संबंधी प्रश्न पूछे जाते हैं।
- पत्र के प्रकार: औपचारिक (सेवा में, महोदय), अनौपचारिक (प्रिय मित्र, स्नेही)
- विषय का उल्लेख: औपचारिक पत्र में मुख्य उद्देश्य स्पष्ट करने के लिए आवश्यक
- व्यवसायिक पत्र: स्पष्ट, संक्षिप्त, सटीक भाषा
- विराम चिन्ह:
- पूर्ण विराम: वाक्य की समाप्ति
- अल्पविराम: समानाधिकरण शब्दों के बीच
- लाघव चिन्ह: संक्षिप्त रूप में लिखने के लिए
- कोष्ठक: पद की व्याख्या के लिए
- हंस पद/त्रुटिबोधक: छूटे शब्दों के लिए
- वर्तनी: उज्ज्वल, अंतर्धान, ज्योत्सना – सही रूप; सन्यासी – अशुद्ध, सन्यासी – शुद्ध
छंद, मात्राएँ और गण
हिंदी काव्य में छंद, मात्राएँ और गण की गणना महत्वपूर्ण है। दोहा, चौपाई, सोरठा आदि छंदों की मात्राएँ और गणों की संख्या परीक्षा में पूछी जाती है।
- चौपाई: प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ, चार चरण
- दोहा: 13-11-13-11 मात्राएँ (दूसरा व चौथा चरण – गुरु के साथ लघु)
- सोरठा: 11-13-11-13 (पहला व तीसरा चरण – 11 मात्राएँ)
- कुंडलिया: दोहा + रोला (6 चरण), प्रारंभ व अंत एक ही शब्द
- गण: कुल 8 (यमाता राज हंसलगा – सूत्र)
विशेष व्याकरणिक बिंदु एवं परीक्षा ट्रिक्स
कुछ विशेष व्याकरणिक बिंदु और ट्रिक्स परीक्षा में बार-बार पूछी जाती हैं। इनका अभ्यास और सही पहचान आवश्यक है।
- द्विगुण/उत्क्षिप्त व्यंजन: ड़, ढ़ (उच्चारण में झटका)
- संयुक्त व्यंजन: छ, त्र, ज्ञ, श्र (चार)
- अंतस्थ व्यंजन: य, र, ल, व (य, व – अर्ध स्वर; र – प्रकंपित/कंपित; ल – लुंठित/पार्श्विक)
- उष्म व्यंजन: श, ष, स, ह (चार)
- संधि: गुण संधि (सुरेश, रमेश), यण संधि (या/व के पहले आधा वर्ण)
- सर्वनाम के भेद: पुरुषवाचक (उत्तम, मध्यम, अन्य), निश्चयवाचक, अनिश्चयवाचक, प्रश्नवाचक, संबंधवाचक, निजवाचक (कुल 6)
- विशेषण की अवस्थाएँ: मूलावस्था (सुंदर), उत्तरावस्था (सुंदरतर), उत्तमावस्था (सुंदरतम)
- संज्ञा के भेद: मूल रूप से 3 (व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक), बाद में समूहवाचक, द्रव्यवाचक जोड़े गए (कुल 5)
- क्रिया विशेषण के भेद: चार – रीतिवाचक, कालवाचक, स्थानवाचक, परिमाणवाचक
- प्रत्यय के भेद: कृत (क्रिया से), तड़ित (संज्ञा/विशेषण से)
- उपसर्ग: संस्कृत में 22
परीक्षा में पूछे गए विशेष प्रश्न एवं लेखक-रचना मिलान
परीक्षा में लेखक-रचना, पत्रिका-संपादक, प्रथम रचनाएँ, उपनाम आदि से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। इनका अभ्यास करें।
- पत्रिका-संपादक:
- कविवचन सुधा – भारतेंदु हरिश्चंद्र
- सरस्वती – महावीर प्रसाद द्विवेदी
- हिंदी प्रदीप – बालकृष्ण भट्ट
- हंस – प्रेमचंद
- प्रथम रचनाएँ:
- प्रथम उपन्यास – परीक्षा गुरु
- प्रथम कहानी – इंदुमती
- खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य – प्रिय प्रवास
- प्रथम आत्मकथा – सवाकाचार
- प्रथम कवि – सरहपा
- उपनाम:
- पंत – प्रकृति का सुकुमार कवि
- महादेवी वर्मा – आधुनिक मीरा
- महत्वपूर्ण पुरस्कार:
- ज्ञानपीठ – साहित्य का सर्वोच्च पुरस्कार, 1965 से, हिंदी में पहला – पंत (चिदंबरा)
- महत्वपूर्ण पत्र:
- उदंत मार्तंड – पहला हिंदी समाचार पत्र, 30 मई 1826, कोलकाता, पंडित जुगल किशोर द्वारा
गद्यांश, अपठित बोध एवं उत्तर-निर्धारण
गद्यांश आधारित प्रश्नों में मुख्य विचार, शीर्षक, शब्दार्थ, उद्देश्य, भाव, लेखक की दृष्टि आदि पूछे जाते हैं। उत्तर निर्धारण के लिए पैसेज को ध्यान से पढ़ना आवश्यक है।
साहित्य का आधार: जीवन, जो परमात्मा की सृष्टि है
उच्च कोटि का साहित्य: जो मनुष्य के हृदय में ऊंचे भाव जगाए
सुबोध: जिसे आसानी से समझा जा सके
मानव जीवन की सार्थकता: निस्वार्थ सेवा और परोपकार में
सूचना क्रांति: सूचनाओं का अंबार, एकाग्रता का अकाल, तकनीक – भौगोलिक दूरी कम, आत्मीय दूरी बढ़ी
अभूतपूर्व: जो पहले कभी न हुआ हो
गद्यांश में प्रयुक्त शब्दों का अर्थ, वाक्य का उद्देश्य, शीर्षक, भाव, लेखक की दृष्टि, आदि पर विशेष ध्यान दें।
Quiz
40 QuestionsClick on an option to find the answer
Question 1 of 40
सन्मति का सही संधि-विच्छेद है
Solution
सत् + मति
Solution
मुख्य रूप से क्रिया के कितने भेद हैं?
Solution
2
Flashcards
12 CardsClick to reveal answerTap the card to see answer