CUET 2026 Geography Complete Marathon CUET - CUET Geography
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CUET 2026 Geography Complete Marathon CUET - CUET Geography
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CUET Hindi Medium by PW
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मानव भूगोल एवं समकालीन भूगोल
मानव भूगोल: परिभाषा और प्रमुख विचारधाराएँ
मानव भूगोल वह शाखा है जिसमें मानव समाज और धरातल के बीच के संबंधों का संश्लेषित अध्ययन किया जाता है। फ्रेडरिक रेडजेल को आधुनिक मानव भूगोल का जनक कहा जाता है, जिन्होंने "एंथ्रोपोजियोग्राफिया" नामक पुस्तक लिखी। एलएनसी सैंपल ने पर्यावरण निश्चयवाद (नियतिवाद) की परिभाषा दी, जबकि विडाल ने संभववाद की अवधारणा दी।
- पर्यावरण निश्चयवाद (नियतिवाद): मानव प्रकृति का गुलाम है, प्रकृति की शक्तियाँ प्रबल हैं। समर्थक: एलएनसी सैंपल, रेडजेल।
- संभाववाद: प्रकृति संभावनाएँ देती है, मानव तकनीक व बुद्धि से उनका उपयोग करता है। समर्थक: विडाल।…
मानव भूगोल एवं समकालीन भूगोल
मानव भूगोल: परिभाषा और प्रमुख विचारधाराएँ
मानव भूगोल वह शाखा है जिसमें मानव समाज और धरातल के बीच के संबंधों का संश्लेषित अध्ययन किया जाता है। फ्रेडरिक रेडजेल को आधुनिक मानव भूगोल का जनक कहा जाता है, जिन्होंने "एंथ्रोपोजियोग्राफिया" नामक पुस्तक लिखी। एलएनसी सैंपल ने पर्यावरण निश्चयवाद (नियतिवाद) की परिभाषा दी, जबकि विडाल ने संभववाद की अवधारणा दी।
- पर्यावरण निश्चयवाद (नियतिवाद): मानव प्रकृति का गुलाम है, प्रकृति की शक्तियाँ प्रबल हैं। समर्थक: एलएनसी सैंपल, रेडजेल।
- संभाववाद: प्रकृति संभावनाएँ देती है, मानव तकनीक व बुद्धि से उनका उपयोग करता है। समर्थक: विडाल।
- नवनिश्चयवाद: ग्रेफिट टेलर द्वारा दिया गया, मानव और प्रकृति के बीच संतुलन की बात, न तो पूर्ण स्वतंत्रता न पूर्ण नियंत्रण।
- प्रमुख परिभाषाएँ:
- फ्रेडरिक रेडजेल: आधुनिक मानव भूगोल का जनक।
- एलएनसी सैंपल: नियतिवाद।
- विडाल: संभववाद।
मानव भूगोल के उपागम
मानव भूगोल के अध्ययन के विभिन्न तरीके समय के साथ विकसित हुए हैं। उपनिवेशिक युग में खोजी यात्राओं के आधार पर, उत्तर उपनिवेशिक युग में प्रादेशिक विश्लेषण, 1930-40 के दशक में क्षेत्रीय विभेदन, 1950-60 के दशक में मात्रात्मक क्रांति (कंप्यूटर व सांख्यिकी का प्रयोग), 1970 के दशक में मानवतावादी, अमूल्यवादी, व्यवहारवादी विचारधाराएँ, और 1990 के दशक में उत्तर आधुनिकतावाद का प्रयोग हुआ।
- मात्रात्मक क्रांति: कंप्यूटर व सांख्यिकी विधियों का प्रयोग।
- मानवतावादी विचारधारा: सामाजिक कल्याण, आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा।
- अमूल्यवादी विचारधारा: सामाजिक असमानता, गरीबी के कारण।
- व्यवहारवादी विचारधारा: जाति, धर्म, प्रजाति के आधार पर व्यवहार का अध्ययन।
- उत्तर आधुनिकतावाद: वैश्विक सिद्धांतों का स्थानीय संदर्भ में अस्वीकार।
मानव भूगोल की शाखाएँ
मानव भूगोल की प्रमुख शाखाएँ सामाजिक भूगोल, जनसंख्या भूगोल, राजनीतिक भूगोल, आर्थिक भूगोल, आवास भूगोल हैं। प्रत्येक शाखा की उपशाखाएँ भी हैं।
- सामाजिक भूगोल: कल्याण भूगोल, व्यवहारवादी भूगोल, चिकित्सा भूगोल, लिंग भूगोल, ऐतिहासिक भूगोल।
- जनसंख्या भूगोल: वितरण, वृद्धि, घनत्व का अध्ययन।
- राजनीतिक भूगोल: सैन्य भूगोल, निर्वाचन भूगोल।
- आर्थिक भूगोल: कृषि भूगोल, उद्योग भूगोल, पर्यटन भूगोल, व्यापार भूगोल।
- आवास भूगोल: ग्रामीण भूगोल, नगरी भूगोल।
जनसंख्या वितरण, घनत्व एवं वृद्धि
जनसंख्या वितरण का अर्थ है पृथ्वी पर जनसंख्या का फैलाव। जनसंख्या घनत्व प्रति वर्ग किलोमीटर में निवास करने वाली जनसंख्या है।
- जनसंख्या घनत्व का सूत्र: कुल जनसंख्या / कुल क्षेत्रफल
- घनत्व को प्रभावित करने वाले कारक:
- भौगोलिक: भू-आकृति (मैदान), जलवायु (सम), उपजाऊ मिट्टी, जल की उपलब्धता।
- आर्थिक: खनिज क्षेत्र, औद्योगिक क्षेत्र, नगर।
- सामाजिक-धार्मिक: भाषा, धार्मिक स्थल।
- राजनीतिक: दंगे, गृह युद्ध।
- जनसंख्या परिवर्तन के घटक: जन्म, मृत्यु, प्रवास।
- प्रवास के कारक: प्रतिकर्ष (मजबूरी में घर छोड़ना), अपकर्ष (आकर्षण के कारण स्थानांतरण)।
जननांकी संक्रमण सिद्धांत एवं माल्थस सिद्धांत
जननांकी संक्रमण सिद्धांत के अनुसार किसी देश की जनसंख्या वृद्धि तीन अवस्थाओं में होती है।
- प्रथम अवस्था: उच्च जन्म दर, उच्च मृत्यु दर, जनसंख्या स्थिर।
- द्वितीय अवस्था: उच्च जन्म दर, मृत्यु दर में गिरावट, जनसंख्या में तीव्र वृद्धि।
- तृतीय अवस्था: निम्न जन्म दर, निम्न मृत्यु दर, जनसंख्या वृद्धि धीमी।
- माल्थस सिद्धांत: जनसंख्या ज्यामितीय दर से बढ़ती है, खाद्य आपूर्ति अंकगणितीय दर से। परिणामस्वरूप अकाल, बीमारी, युद्ध आदि से जनसंख्या नियंत्रित होती है।
मानव विकास: अवधारणा, मापन एवं उपागम
मानव विकास का अर्थ है मानव की गुणवत्ता में सुधार। वृद्धि मात्रात्मक होती है, विकास गुणात्मक व सकारात्मक।
- मानव विकास की संकल्पना: महबूब उल हक (1990), तीन बिंदु – स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रति व्यक्ति आय।
- मानव विकास के चार पिलर: समता (इक्वलिटी), सतत पोषणीयता, उत्पादकता, सशक्तिकरण।
- मानव विकास के उपागम: आय उपागम, कल्याण उपागम, आधारभूत आवश्यकता उपागम (ILO), क्षमता उपागम (अमृत सेन)।
- मानव विकास सूचकांक (HDI): 0 से 1 के बीच स्कोर, जितना अधिक उतना विकसित।
- मानव गरीबी सूचकांक: मानव विकास की कमी को मापता है।
- भूटान का GNH (हैप्पीनेस इंडेक्स): 2012 में जारी।
आर्थिक क्रियाकलाप: प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक, चतुर्थक, पंचम
आर्थिक क्रियाकलापों के पाँच प्रकार हैं, जिनसे मानव आय अर्जित करता है।
- प्राथमिक क्रियाएँ: कृषि, पशुपालन, खनन, मछली पकड़ना, शिकार, संग्रहण।
- भोजन संग्रहण, चलवासी पशुचारण (ऋतु प्रवास), वाणिज्यिक पशुपालन।
- कृषि के प्रकार: आदिकालीन निर्वाह (झूम, मिलपा, लदांग), गहन निर्वाह (चावल प्रधान/रहित), रोपण कृषि, विस्तृत वाणिज्यिक अनाज कृषि, मिश्रित कृषि, डेयरी कृषि, भूमध्य सागरीय कृषि, ट्रक फार्मिंग।
- खनन: धरातलीय, भूमिगत (कूपकी खनन)।
- द्वितीयक क्रियाएँ: विनिर्माण, उद्योग, ब्लू कॉलर श्रमिक।
- उद्योगों का वर्गीकरण: आकार (कुटीर, लघु, बड़े), कच्चा माल (कृषि, खनिज, वन, पशु आधारित), उत्पाद (आधारभूत, उपभोक्ता), स्वामित्व (सरकारी, निजी, संयुक्त), उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग (सफेद कॉलर श्रमिक)।
- तृतीयक क्रियाएँ: सेवा क्षेत्र – व्यापार, पर्यटन, परिवहन, संचार, चिकित्सा पर्यटन।
- चतुर्थक क्रियाएँ: ज्ञान आधारित – सूचना, संग्रहण, प्रेषण, सॉफ्टवेयर डेवलपर, सांख्यिकविद, प्रोफेसर।
- पंचम क्रियाएँ: उच्चतम निर्णय व नीति निर्माण – CEO, निदेशक, नीति निर्माता, स्वर्ण कॉलर श्रमिक।
- आउटसोर्सिंग: विकसित देशों के कार्य विकासशील देशों में करवाना (BPO, KPO)।
- अंक विभाजन: विकसित व विकासशील देशों में सूचना व संचार प्रौद्योगिकी की खाई।
परिवहन एवं संचार
परिवहन के साधन स्थल, जल, वायु, पाइपलाइन हैं। संचार में मोबाइल, इंटरनेट, रेडियो, टीवी (जनसंचार) आते हैं।
- स्थल परिवहन: सड़कें (महामार्ग – पेन अमेरिका), रेल मार्ग (पार साइबेरियन, पार कनेडियन, पार ऑस्ट्रेलियन, ओरिएंट एक्सप्रेस)।
- जल परिवहन: महासागरीय मार्ग (उत्तरी अटलांटिक – वृत्त ट्रंक मार्ग, भूमध्य सागर-हिंद महासागर मार्ग), नहरे (स्वेज, पनामा), आंतरिक जलमार्ग (राइन, वोल्गा, मिसीसिपी)।
- पाइपलाइन: बिग इंच (अमेरिका, पेट्रोलियम)।
- संचार: उपग्रह (आर्यभट्ट, भास्कर), साइबर स्पेस (इंटरनेट)।
ग्रामीण व नगरीय बस्तियाँ एवं नगरों के प्रकार
ग्रामीण बस्तियों के प्रकार: गुच्छित, परिच्छिप्त, अर्धगुच्छित, पल्लीकृत। नगरों के प्रकार: छावनी नगर (अंबाला), खनन नगर (झरिया), परिवहन नगर (कांडला, कोच्ची, विशाखापत्तनम, मुगलसराय)।
- मेगा नगर: जनसंख्या 50 लाख से अधिक।
- स्मार्ट सिटी मिशन: बुनियादी सुविधाएँ, गरिमापूर्ण जीवन।
- स्थानीय नाम: पापा, पाड़ा, पल्ली, नागला, ढानी – पल्लीकृत बस्तियाँ।
संसाधन, कृषि, जल, खनिज, ऊर्जा एवं नियोजन
- कृषि ऋतु: रबी (गेहूं, चना), खरीफ (चावल, कपास), जायद।
- ओस, अमन, बोरो: चावल की किस्में (पश्चिम बंगाल, असम)।
- रक्षक सिंचाई: फसलों की रक्षा हेतु।
- नरमा: उत्तर पश्चिम भारत में अमेरिकन कपास।
- जल संसाधन: भारत के पास विश्व का 4% जल।
- जल प्रदूषण: पश्चिम बंगाल, बिहार – आर्सेनिक; गुजरात, महाराष्ट्र – फ्लोराइड।
- जल संरक्षण: कुंड/टांका (राजस्थान), नीति (तमिलनाडु)।
- खनिज: डिगबोई (सबसे पुराना तेल क्षेत्र), नेवली (लिग्नाइट), कोरापुट (बॉक्साइट), बेलाडीला (लोहा)।
- ऊर्जा: सौर, पवन, भूतापीय (मणिकरण, हिमाचल), परमाणु (तारापुर, रावतभाटा)।
- सतत पोषणीय विकास: ब्रटलैंड रिपोर्ट (Our Common Future, 1987)।
- नियोजन: खंडित, प्रादेशिक, लक्ष्य क्षेत्र, लक्ष्य समूह नियोजन।
- विशेष योजनाएँ: आईटीडीपी (गद्दी जनजाति, भारमोर), इंदिरा गांधी नहर (हरीके बैराज, कवरसेन द्वारा संकल्पना)।
महत्वपूर्ण तथ्य व परीक्षा बिंदु
- फ्रेडरिक रेडजेल: आधुनिक मानव भूगोल का जनक।
- एलएनसी सैंपल: नियतिवाद।
- विडाल: संभववाद।
- ग्रेफिट टेलर: नवनिश्चयवाद।
- महबूब उल हक: मानव विकास की संकल्पना।
- ILO: आधारभूत आवश्यकता उपागम।
- अमृत सेन: क्षमता उपागम।
- HDI: 0 से 1 के बीच।
- भूटान: GNH (2012)।
- डिगबोई: भारत का सबसे पुराना तेल क्षेत्र।
- मणिकरण: भूतापीय ऊर्जा संयंत्र।
- ब्रटलैंड रिपोर्ट: Our Common Future (1987)।
- इंदिरा गांधी नहर: हरीके बैराज, कवरसेन द्वारा संकल्पना (1948)।
- आईटीडीपी: गद्दी जनजाति, भारमोर (हिमाचल)।
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Question 1 of 40
भरमौर में प्रमुख आर्थिक गतिविधि क्या है?
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कृषि और पशुपालन
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सांस्कृतिक भूगोल, जो मानव भूगोल का एक उपक्षेत्र है, निम्नलिखित में से किन विषयों से अंतर्संबंध रखता है?
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मानवविज्ञान